Description
MJY-004 कुण्डली निर्माण
(सत्रीय कार्य)
पाठ्यक्रम कोड : MJY-004.
सत्रीय कार्य कोड : MJY-004 /2024–25
कुल अंक : 100
नोट : यह सत्रीय कार्य 02 खण्डों में विभक्त है। सभी खण्ड अनिवार्य हैं। 15 अंक के प्रश्नों का विस्तृत उत्तर दीजिए। 10 अंक के प्रश्नों का लगभग आठ सौ शब्दों में उत्तर देना है।
खण्ड–1
निर्देश– निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दीजिए :
15X4=60
- कुण्डली निर्माण में चालान विधि व इष्टकाल का उल्लेख कीजिए।
- बलाबल के निर्धारक अवयवों में राशि एवं ग्रह का स्वरूप निरूपित कीजिए।
- लग्न साधन का किसी उदाहरण के द्वारा विस्तृत वर्णन कीजिए।
- अष्टक वर्ग किसे कहते हैं? इसके साधन की विधि का विस्तार से वर्णन कीजिए।
- दशा साधन के आलोक में विंशोत्तरी दशा का वर्णन कीजिए।
- तात्कालिक ग्रह स्पष्ट में सूर्योदय तथा सूर्यास्त का क्या स्वरूप है? वर्णन कीजिए।
- पञ्चांग द्वारा ग्रहों का तात्कालिक स्पष्टिकरण किस प्रकार होता है? उल्लेख कीजिए।
खण्ड–2 4X10=40
निर्देश: अधोलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
- दशमलन साधन की विधि का वर्णन कीजिए।
- भाव साधन में चलित भाव चक्र का निर्माण कैसे होता है? उल्लेख कीजिए।
- दृष्टि विचार की अवधारणा का उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।
- षड्वर्ग से क्या समझते हैं? वर्णन कीजिए।
- भारतीय ज्योतिष शास्त्र में ग्रहमेत्री की क्या उपयोगिता है? सिद्ध कीजिए।
- भयात और भोग को उदाहरण से परिभाषित कीजिए।
- सूक्ष्म दशा और प्राण दशा की संकल्पना का वर्णन दीजिए।
- नक्षत्र राशि एवं ग्रहों का सम्बन्ध क्या है? उल्लेख कीजिए।




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