Description
एम.एच.डी –23 : मध्यकालीन कविता – 1
सत्रीय कार्य
(सभी खण्डों पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : MHD-23
सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी-23 / 2026-2027
कुल अंक : 100
1. निम्नलिखित काव्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए: (10×3=30)
(क) पेट कहौं सुन बउचक राजा। ऐपन सान कोंपर साजा।।
पूरन खांड सपूरन बोरे। जहावां दीसहिं तहबां गोरे।।
जानु सुहारी घिरत पकाये। देखत पान फूल पतराये।।
नाभी कुण्ड जो डुबखी परो। देखतहिं बूढ़ न पावइ तीरो।।
जानों अंत पेट महँ नाही। अंतर क चाँद दीस परछांहीं।।
(ख) ऐसा चाहौं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न।
छोट बड़ो सभ सम बसैं, रैदास रहे प्रसन्न।।
(ग) राधा जल बिहरति सखियनि सँग।
ग्रीव-प्रजंत गिर मैं ठाढ़ी, छिरकति जल अपनैं अपनैं रंग ||
मुख भरि नीर परस्पर डारतिं, सोभा अतिहिं अनूप बढ़ी तब ।।
मनहु चंद-गन सुधा गँडूपनि, डारति हैं आनंद भरे सब।।
आईं निकसि जानु कटि लौं सब, अंजुरिनि तैं लै लै जल डारतिं।
मानहु सूर कनक-वल्ली जुरि, अमृत बूंद पवन-मिस झारतिं ||
(घ) नौ लख गाय सुनी हम नन्द के तापर दूध दही न अघाने।
माँगत भीख फिरौ बन ही बन झूठि ही बातन के पन पाने।।
और की नारिन के मुख जोबत लाज गहौ कछु होहु सयाने।
जाहु भले जु चले घर जाहु चले बस जाउ वृंदावन जाने।।
2.निम्नलिखित प्रश्नों के अंतर्गत भगवान 500 500 शब्दों में दीजिए
(क) सगुण काव्यधारा के प्रमुख परिभाषिक शब्दों पर प्रकाश डालिए।
(ख) “चंदायन’ की प्रेम पद्धति का विवेचन कीजिए।
(ग) सूरदास के काव्य में अभिव्यक्त वात्सल्य और श्रृंगार का सोदाहरण विश्लेषण कीजिए।
3.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में दीजिए :
(क) रसखान की रचनाएँ
(ख) सूफी काव्य परंपरा
(ग) रविदास का निर्गुण काव्य में योगदान





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