Description
एम.ए.डी.–18
(दलित साहित्य की अवधारणा और स्वरूप के सभी खण्डों पर आधारित)
सत्रीय कार्य कोड : एम.ए.डी.–18 / टी.एम.ए. / जुलाई 2025–जनवरी 2026
कुल अंक : 100
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं ‘दस’ प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दें।
10X10=100
1.दलित साहित्य की अवधारणा को विस्तार से समझाइए।
2.डॉ. अम्बेडकर के मुक्ति संघर्ष के विविध आयामों की चर्चा कीजिए।
3.‘सत्यशोधक समाज’ के गठन की पृष्ठभूमि बताते हुए उसके सिद्धान्तों का मूल्यांकन कीजिए।
4.प्रेमचंद के दलित पात्र व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करते हुए रचना में किस तरह खड़े होते हैं।
5.दलित साहित्य के लिए अलग सौंदर्यशास्त्र क्यों ज़रूरी है? बताइए।
6.दलित साहित्य में आत्मकथा एक प्रमुख विधा है। कैसे? समझाइए।
7.सामाजिक गुलामी से आप क्या समझते हैं? यह राजनीतिक गुलामी से किस प्रकार अलग है? चर्चा कीजिए।
8.महात्मा फूले के साथ महाराष्ट्र का समाज किन परिवर्तनों से गुजर रहा था?
9.स्वामी अछूतानन्द के रचनात्मक योगदान को स्पष्ट कीजिए।
10.सामाजिक जागरण में हीरा डोम के योगदान पर प्रकाश डालिए।
11.‘गुलामगिरी’ पुस्तक द्वारा महात्मा ज्योतिबाफूले ने वर्ण वर्चस्ववाद की कठोर आलोचना की है, इस कथन की विवेचना कीजिए।
12.डॉ. अम्बेडकर के स्त्री मुक्ति चिंतन और स्त्री अधिकारों के लिए संवैधानिक प्रयासों पर विस्तार से टिप्पणी लिखिए।
13.पेरियार ई. वी रामास्वामी नायकर के आत्मसम्मान आंदोलन की क्रांतिकारी भूमिका स्पष्ट करें।
14.दक्षिण भारत में श्री नारायण गुरु के चिंतन से निर्मित हुई स्त्री मुक्ति की चेतना को स्पष्ट कीजिए।






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