Description
सत्रीय कार्य
BSKC -106
काव्यशास्त्र और साहित्यिक आलोचना
पाठ्यक्रम कोड : BSKC -106
पाठ्यक्रम शीर्षक :
सत्रीय कार्य: BSKC -106/TMA/2026-27
पूर्णांक : 100
नोट – सभी प्रश्न अनिवार्य हैं : –
1.संस्कृत काव्यशास्त्र की उत्पत्ति और विकास पर प्रकाश डालें । 20
अथवा
दृश्य, श्रव्य एवं मिश्र (चम्पू) का विस्तार से वर्णन करें।
2.काव्यप्रकाश के अनुसार लक्षण शब्दशक्ति का विशद विवेचन करें। 20
अथवा
मम्मट के काव्य लक्षण का विस्तार से वर्णन करें।
3.साहित्य दर्पण के अनुसार खण्डकाव्य, का वर्णन करें । 10
अथवा
मम्मट के अनुसार काव्य हेतु का वर्णन करें ।
4.भट्टलोल्लट के उत्पत्तिवाद विवेचन का करें ।
अथवा
अभिनवाभिधानवाद’ का वर्णन करें
5.विभावना अथवा अपह्नुति अलंकार का लक्षण बताते हुए उदाहरण को स्पष्ट कीजिए।
6.निम्नलिखित श्लोक में कौन-सा अलंकार है लक्षण बताते हुए स्पष्ट कीजिए।
स्वतेजः समरोषु त्वां विजयश्रीनमुंचित ।
प्रभावप्रभवं कान्तं स्वाधीनपतिका यथा।।
अथवा
तिष्य दृष्ट एव तस्या निवृत्ति मनोभव ज्वलितम ।
आलोके हि हिमांशोर्विकसति कुसुमं कुमुद्वत्याः ॥
7.उपजाति अथवा स्रग्धरा छंद का लक्षण देते हुए उसके उदाहरण श्लोक का स्पष्टीकरण लिखिए।
8.निम्नलिखित श्लोक में कौन-सा छंद है उसका लक्षण बताते हुए स्पष्टीकरण दीजिए:
वागार्थाविव सम्पृक्तौ वागार्थप्रतिपत्तये।
जगतः पितरौ वन्दे पार्वतीपरमेश्वरो।।
अथवा
जानंतं वंशे भुवनविदिते पुष्करावर्तकानां
जानामि त्वां प्रकृतिपुरुषं कामरूपं मधानः।
तेनार्थित्वं त्वयि विधिवशाद्दूरबन्धुर्गतोऽहं
यांचामोघा वरमधिगुणे नाधमे लब्धकामा।।



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