Description
BKSC-104
गीता में आत्मानुशासन
(सत्रीय कार्य–2026-27)
पाठ्यक्रम कोड–बी.एस.के.सी-104
पाठ्यक्रमशीर्षक–गीता में आत्मानुशासन
सत्रीय कार्य कोड : BKSC-104/2026-27
पूर्णांक – 100
नोट : सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
खण्ड 1
1. गीता का परिचय देते हुए गीता का अभिप्राय स्पष्ट करें और गीता के प्रयोजन एवं उसके प्रतिपाद्य विषय का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
20
अथवा
गीता की सामाजिक और सांस्कृतिक महत्त्व का विस्तारपूर्वक उल्लेख करें।
2. गीता की मुख्य शिक्षाओं का विस्तृत रूप से उल्लेख करें।
20
अथवा
गीता के अनुसार पुरुषार्थ चतुष्टय की अवधारणा पर प्रकाश डालें।
3. गीता के निष्काम कर्म योग के अभिप्राय और उसके फल पर विस्तारपूर्वक लिखें।
20
अथवा
गीता में वर्णित आत्म तत्व का विस्तृत रूप से उल्लेख करें।
खण्ड 2
4. निम्नलिखित में से किन्हीं दो श्लोकों की सप्रसंग व्याख्या करें।
क)न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्म सङ्गिनाम्।
ज्योषयेत्सर्वकर्माणि विद्वान्युक्तः समाचरन्।।
ख)न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः।।
ग)नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत।
स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव।।
घ)विहाय कामान् यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः।
निर्ममो निरहंकारः स शान्तिमधिगच्छति।।
4. निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी करें।
क) गीता में कर्मयोग की प्रशंसा
ख) शारीरिक और मानसिक अनुशासन
ग) काम पर नियंत्रण
घ) गीता में स्थितधी की प्रशंसा



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