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MSK-8 2025-26 SOLVED ASSIGNMENT

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सत्रीय कार्य : 2025 – 2026

स्नातकोत्तर कला उपाधि कार्यक्रम (संस्कृत)

MSK 008_संस्कृतसाहित्य : गद्य, पद्य एवं नाटक

पाठ्यक्रम कोड – MSK-008
पाठ्यक्रम शीर्षक – संस्कृतसाहित्य : गद्य, पद्य एवं नाटक
सत्रीय कार्य – MSK-008 /TMA/2025-2026

Description

सत्रीय कार्य : 2025 – 2026

स्नातकोत्तर कला उपाधि कार्यक्रम (संस्कृत)

MSK 008_संस्कृतसाहित्य : गद्य, पद्य एवं नाटक

पाठ्यक्रम कोड – MSK-008
पाठ्यक्रम शीर्षक – संस्कृतसाहित्य : गद्य, पद्य एवं नाटक
सत्रीय कार्य – MSK-008 /TMA/2025-2026

पूर्णांक – 100
नोट – सभी प्रश्न अनिवार्य हैं : –

प्रश्नसं 1. निम्नलिखित में से किसी पाँच (05) की ससंदर्भ व्याख्या कीजिए –
5 × 10 = 50

क. अधीतिवोधाचरणप्रचारणैर्दर्शाश्चतस्र: प्रणयान्नुपाधिभिः |

 

चतुर्दशत्वं कृतवान्कृतः स्वयं न वेदिम् विद्यासु चतुर्दशस्वयम्॥

 

ख. अथ गीतावसाने मूकिभूतवीणा प्रशान्तमधुकररुतवे कुमुदिनी सा कन्यका समुत्थाय

प्रदक्षिणीकृत्य कृ तहरप्रणामा परिवृत्य स्वभावधवलया तपःप्रभावप्रगल्भया दृष्ट्या समाध्वासयन्तीव,

पुण्यैरेव स्पृहन्ती तीर्थ जलैरिव प्रक्षालयन्ती, तपोभिरिव पावयन्ती, शुद्धिमिव कुर्वाणा, वरदानम्

इवोपपादयन्ती पवित्रतामिव नयन्ती, चन्द्रपीडमाबभाषे – स्वगातमतिथये, कथमिमां भूमिनमुप्रातो

महाभाग: , तदुत्तिष्ठ, आगम्यताम् , अनुभूतातिमातिथिसत्कार: इति । एवमुक्तस्तु तया सम्भाषण

–मात्रेणैवानुगृहीतमात्मानं मन्यमान उत्थाय भक्त्या कृतप्रणामो भगवति। यथाज्ञापयसि इत्यभिधाय

दर्शितविनयः शिष्य इव तां व्रजन्तीमनुव्राज ।

 

ग. वितरति गुरु: प्रज्ञो विद्यां यथैव तथा जडे

न तु खलु तयोर्ज्ञाने शक्ति करोत्यपहन्ति वा ।

भवति हि पुनर्भूयान् भेद: फलं प्रति तद्यधा

प्रभवति शुचिर्बिम्बग्राहे मणिर्न मृदादय: ।।

 

घ. ये कुन्दद्युतय: समस्तभुवने: कर्णावतंसीकृता

यै: सर्वत्र शलाकयेव लिखितैर्दिग्भित्तयश्चित्रिता: ।

यैर्वक्तुं हृदि कल्पितैरपि वयं हर्षेण रोमाञ्चिता

स्तेषां पाण्डिवपुंगव: स महतामेको गुणानां निधि: ।।

 

ङ. त्रिदिवसमृद्धिस्पर्ध्या भान्ति यस्यां

सुरसदनशिखाग्रेष्वाग्रहग्रन्थिनद्धा ।

नभसि पवनवेल्लत्पल्लवैरुल्लसदि्भ:

परममिह वहन्त्यो वैभवं वैजयन्त्य: ।।

च . प्रयातुर्मस्माकमियं कियत्पदं धरातद्भोऽधिरिप्शलायता।
इतीव वाञ्छेनिजवेगदर्पितैः पयोधिरोधक्षमुद्दरतं जः।।

प्रश्नसं 2. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं पाँच (05) प्रश्नों के उत्तर लिखिए–
5 × 10 = 50

(क) नैषधीयचरितम् के लेखक की भाषा शैली की विशेषताओं को अपने शब्दों में लिखिए।

(ख) नैषधीयचरितम् के प्रथमसर्ग के आधार पर वन शोभा का वर्णन कीजिए।

(ग) महाकवि बाणभट्ट की काव्यशैली का वर्णन कीजिए।

(घ) त्रिविक्रमभट्ट के व्यक्तित्व व रचनाओं पर लेख लिखिए।

(ङ.) कालिदास की काव्यशैली का वर्णन कीजिए।

(च) गद्य साहित्य के उद्भव एवं विकास पर लेख लिखिए।

 

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