Description
एम.एच.डी – 21 मीरा का विशेष अध्ययन
सत्रीय कार्य
(संपूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : MHD–21
सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी.–21 /2026-2027
कुल अंक : 100
1.निम्नलिखित काव्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 10×3=30
(क)करनां फकीरी क्या दिलगीरी, सदा मगन मन रहना रे।
कोई दिन बाड़ी तो कोई दिन बंगला, कोई दिन जंगल रहना रे।।
कोई दिन हाथी कोई दिन घोड़ा, कोई दिन पाँवों चलना रे।।
कोई दिन गादी कोई दिन तकिया, कोई दिन भोय में पड़ना रे।।
कोई दिन खाना तो कोई दिन पीना, कोई दिन भूखे ही मरना रे।।
(ख) राणाजी हैं तो गिरधर के मन भाई।
जैमल के धारे जनम लियो है, राणाँ ने परणाई।
साचा सनेही म्हारै रामसंतजन, जासूँ प्रीति लगाई।।
पुरबै जनम की होती गोपक्या, चूक पड़ी मुझि माँही।
जागत लाज उपजी घट भींतर, तब हरि नैं छिटकाई।।
जे पकड़ोगा हाथ हमारो, खबरदार मन माँही।
(ग) अब कोऊ कछु कहो दिल लागारै।
जाकी प्रीत लगी लालन से, कंचन मिला सुहागा रै।।
हंसा की प्रकृत हंसा जाणे, का जाणै नर कागा रै।।
तन भी लागा मन भी लागा, ज्यों बामण गल धागा रै।।
मीरा के प्रभु गिरिधरनागर, भाग हमारा जागा रै।।
2.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए :
i. भक्ति आंदोलन में मीरा के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
ii. मध्यकालीन भारतीय भक्त कवयित्रियों का परिचय दीजिए।
iii. मीरा की काव्यभाषा की विशिष्टताओं की विवेचना कीजिए।
3.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए :
i. भक्ति आंदोलन के प्रेरक आचार्य
ii. भारतीय चिन्तन परंपरा में कृष्ण
iii. मीरा के आराध्य
iv. मीरायुगीन दार्शनिक पृष्ठभूमि
v. प्रगतिशील आलोचना में मीरा




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