Description
एम.एच.डी.–18
दलित साहित्य की अवधारणा और स्वरूप
सत्रीय कार्य (2026–2027)
पाठ्यक्रम कोड : एम.एच.डी.–18 / एम.ए.
सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी.–18 / टी.एम.ए / 2026–2027
कुल अंक : 100
खंड – 1
नोट: सभी प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दें। 10×10 = 100
1.‘सत्यशोधक समाज’ के गठन की पृष्ठभूमि बताते हुए उसके सिद्धांतों का मूल्यांकन करें।
2.दलित विमर्श की वैचारिकी और प्रेमचंद की दलित चेतना के अंतः संबंध को स्पष्ट कीजिए।
3.महात्मा फुले के अनुसार नारी उत्थान का मूलगामी आधार क्या है? नारी शिक्षा के लिए उनके प्रयासों की चर्चा कीजिए?
4.डॉ. अम्बेडकर के उन अवदानों पर विस्तारपूर्वक विचार कीजिए जिनसे दलित मुक्ति आन्दोलन को नयी दिशा मिली।
5.पेरियार के धार्मिक विचारों पर टिप्पणी लिखिए।
6.वैकम सत्याग्रह के दौरान प्रस्तुत श्री नारायण गुरु के विचारों को स्पष्ट कीजिए।
7.दलित साहित्य के लिए अलग सौंदर्यशास्त्र क्यों ज़रूरी है?
8.दलित आलोचना की विभिन्न पीढ़ियों के अवदान पर विचार कीजिए।
9.डॉ. अम्बेडकर के नारी के संबंधी चिंतन पर विचार प्रस्तुत कीजिए।
10.प्रेमचंद के दलित पात्र व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करते हुए रचना में किस तरह खड़े होते हैं? स्पष्ट कीजिए।





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