Description
एम.एच.डी.–10
प्रेमचंद की कहानियाँ
सत्रीय कार्य
(सभी खंडों पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : MHD/MAHD –10
सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी.–10/ टी.एम.ए./2026—2027
कुल अंक : 100
सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1.निम्नलिखित में से किन्हीं दो की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए:
(क) हृदय मसोस रहा था कि और पूड़ियाँ कैसे पाऊँ। संतोष–सेतु जब टूट जाता है तब इच्छा का बहाव अपरिमित हो जाता है। मतवालों को मद स्मरण करना उनके मदांध बनाता है। काकी का अधीर मन इच्छा के प्रबल प्रवाह में बह गया। उचित और अनुचित का विचार जाता रहा। वे कुछ देर तक उस इच्छा को रोकती रहीं। सहसा लाडली से बोलीं मेरा हाथ पकड़ कर वहाँ ले चलो जहाँ मेहमानों ने बैठ कर भोजन किया है।
(ख) अलोपीदीन ने कलमदान से कलम निकाली और उसे वंशीधर के हाथ में दे कर बोले, न मुझे विद्वता की चाह है न अनुभव की, न मर्मज्ञता की, न कार्य–कुशलता की। इन गुणों के महत्त्व का परिचय खूब पा चुका हूँ। अब सौभाग्य और सुवअवसर ने मुझे वह मोती दे दिया है, जिसके सामने योग्यता और विद्वता की चमक फीकी पड़ जाती है। यह कलम लीजिए, अधिक सोच–विचार न कीजिए, दस्तखत कर दीजिए। परमात्मा से यही प्रार्थना है कि वह आपको सदैव वही नदी के किनारे वाला, बेमुरौवता, उद्दंड, कठोर परंतु धर्मनिष्ठ दरोगा बनाए रखें।
(ग) इसके बाद ही पंडितजी पहुँचे पर…..चमरौने का कोई आदमी लाश उठा लाने को तैयार न हुआ, हाँ दुखी की स्त्री और कन्या दोनों हाय-हाय करती वहाँ चली और पंडितजी के द्वार पर आकर सिर पीट-पीटकर रोने लगीं। उनके साथ दस-पाँच और…..चमरिनें थीं। कोई रोने की, कोई समझाती थी, पर……चमरौने एक भी न आया। पंडितजी ने ….चमार को बहुत धमकाया, समझाया, मिन्नत की; पर चमारों के पर पुलिस का रोब छाया हुआ था, एक भी न मिनका। आखिर निराश होकर लौट आये।
2.प्रेमचंद की कहानियों में स्वाधीनता आन्दोलन के चित्रण पर प्रकाश डालिए।
3.प्रेमचंद की कहानियों में चित्रित किसानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
4.प्रेमचंद की नारी विषयक दृष्टि का निरूपण ‘बेटों वाली विधवा’ कहानी के आधार पर कीजिए।
5.‘विध्वंस’ कहानी की प्रासंगिकता पर विचार कीजिए।
6.‘कफन’ कहानी की मूल संवेदना पर प्रकाश डालिए।






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