Description
सत्रीय कार्य
(संपूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.सी.-110 / बी.ए. (ऑनर्स)
सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.सी.-110 / 2026–27
कुल अंक : 100
खंड–1
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।
12×3=36
1. चार दिन तक पलक नहीं झाँपी। बिना फेरे घोड़ा बिगड़ता है और बिना लड़े सिपाही। मुझे तो संगीन चढ़ाकर मार्च का हुक्म मिल जाए। फिर सात जर्मनों को अकेला मारकर न लौटूँ तो मुझे दरबार साहब की देहली पर माथा टेकना नसीब न हो।
2. न जाने कितनी बाकी है, जो किसी तरह चुकने ही नहीं आती। मैं कहती हूँ तुम क्यों नहीं खेती छोड़ देते? मर-मर काम करो, उपज हो तो बाकी दे दो, चलो छुट्टी हुई! बाकी चुकाने के लिए ही तो हमारा जन्म हुआ है। पेट के लिए मजूरी करो। ऐसी खेती से बाज़ आओ।
3. अपने वस्तु की दूसरे के मुख से प्रशंसा सुनने के लिए उनका हृदय अधीर हो गया। घोड़े को खोलकर बाहर गए। घोड़ा वायु-वेग से उड़ने लगा उसकी चाल को देखकर खड़्ग सिंह के हृदय पर साँप लोट गया। वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर वह अपना अधिकार समझता था। उसके पास बाहुबल था और आदमी भी। जाते-जाते उसने कहा, “बाबा जी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।”
4. ट्रंके अब तक भर चुकी थी। शाहनी अपने को खींच रही थी। गाँव वालों के गलों में जैसे धुआँ उठ रहा है। शेरा, चूनी शेर का दिल टूट रहा है। दाऊद खाँ ने आओ बढ़कर ट्रक का दरवाजा खोला, शाहनी बढ़ती, इस्माइल ने आगे बढ़कर भारी आवाज में कहा, “शाहनी, कुछ कह जाओ। तुम्हारे मुँह से निकली ऐसी झूठ नहीं हो सकती।” और अपने साफे से आँखों का पानी पोंछ लिया । शाहनी ने उठती हुई हिचकी को रोककर रुँधे-रुँधे से कहा, “रब तुहानू सलामत रखे बच्चा, खुशियाँ बख्शे…”
खंड–2
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 700–800 शब्दों में लिखिए।
5.हिंदी कहानी के विभिन्न आंदोलनों पर प्रकाश डालिए।
6.‘एक रात’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता को सोदाहरण प्रतिपादित कीजिए।
7.‘पिता’ कहानी का प्रतिपाद्य लिखिए।
खंड–3
8.निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए।
(क) हिंदी कहानी के विभिन्न आंदोलन
(ख) ‘हार की जीत’ कहानी की सार्थकता



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