Description
भारतीय काव्यशास्त्र
सत्रीय कार्य
(संपूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित)
सत्रीय कार्य कोड : BHDC.–106 / 2025–26
कुल अंक : 100
नोट : सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। दस अंक के प्रश्नों के उत्तर लगभग आठ सौ शब्दों में तथा पाँच अंकों के प्रश्नों के उत्तर लगभग चार सौ शब्दों में दीजिए।
- काव्यशास्त्र की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए रीतिकाल में काव्यशास्त्र के विकास का वर्णन कीजिए।
- आधुनिक काल में भारतीय काव्यशास्त्र के विकास पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
- काव्य-लक्षण से संबंधित प्रमुख आचार्यों के विचारों पर प्रकाश डालिए।
- काव्यहेतु से संबंधित विभिन्न आचार्यों के मत का विवेचन कीजिए।
- विभिन्न आचार्यों के द्वारा विश्लेषित भरतमुनि के रस सिद्धांत का वर्णन कीजिए।
- अलंकार के महत्व को समझाते हुए प्रमुख शब्दालंकारों का सादाहरण वर्णन कीजिए।
- ध्वनि का अर्थ स्पष्ट करते हुए ध्वनि सिद्धांत के समर्थक आचार्यों का विवेचन कीजिए।
- औचित्य सिद्धांत अपने विचार व्यक्त कीजिए।
- निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए:
(क) मात्रिक छंद
(ख) प्रतिभा
(ग) रीति
(घ) अर्थालंकार





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