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BHDC-103 HM 2026-27 SOLVED ASSIGNMENT

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आदिकालीन एवं मध्यकालीन हिंदी कविता
सत्रीय कार्य
(संपूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : बी.एड.जी.सी.—103 / बी.ए.जी.
सत्रीय कार्य कोड : बी.ए.जी.डी.सी.—103 / 2026–27
HINDI SUBJECT

Description

आदिकालीन एवं मध्यकालीन हिंदी कविता
सत्रीय कार्य
(संपूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : बी.एड.जी.सी.—103 / बी.ए.जी.
सत्रीय कार्य कोड : बी.ए.जी.डी.सी.—103 / 2026–27
कुल अंक : 100
नोट : सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। दस अंक के प्रश्नों का उत्तर लगभग आठ सौ शब्दों में तथा पाँच अंकों के प्रश्नों के उत्तर लगभग चार सौ शब्दों में दीजिए।
भाग–1
1. निम्नलिखित पद्यांशों में से चार की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए :

(क)काहे को ब्याही विदेस रे, लखि बाबुल मोरे।
हम तो बाबुल तोरे बागों की कोयल
कुहुकत घर-घर जाऊँ, लखि बाबुल मोरे।
हम तो बाबुल तोरे खेतों की चिड़िया,
चुग्गा चुगात उड़ी जाऊँ, लखि बाबुल मोरे।
हम तो बाबुल तोरे बेले की कलियाँ,
जो माँगे चली जाऊँ, लखि बाबुल मोरे।
हम तो बाबुल तोरे खूटे की गइया,
जित हाँको हँक जाऊँ, लखि बाबुल मोरे।

(ख) उद्धव तुम हौ चतुर सुजान।
हमकौं तुम सोई सिख दीजौ, नंद सुवन की आन।।
आमिश है भोजन हित जाकौ, सो क्यों सागहिं मान।
ता मुख सेम पात परसत, जा मुख खाए पान।।
किंगरी स्वर कैसैं सचु मानत, सुनि मुरली के तान।
सुख तौ ता दिन होइ सूर ब्रज, जा दिन आवै कान्ह।।
(ग) मेरे मन राम नाम बसी।
तेरे कारण स्याम सुन्दर, सकल लोगां हँसी।।
कोई कहे मीरा भई बावरी, कोई कहे कुल नासी।
कोई कहै मीरा दीप आखरी नाम पिया सूं रूसी।।
खाण्ड धार भक्ति की न्यारी, काटी है जम फांसी।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सबद सरोवर धांसी।।

(घ) या अनुरागी चित्त की गति समुझै नहिं कोइ।
ज्यों ज्यों बूड़ै स्याम रंग, त्यों त्यों उज्जलु होइ।।
नहिं परागु नहिं मधुर मधु, नहिं विकासु इहिं काल।
अली कली ही सौं बँध्यो, आगैं कौन हवाल।।
बतरस—लालच लाल की मुरली धुरी लुका।
साँह करै भौंहनु हँसै, दैन कहैं नटि जाइ।
(ड.) एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय।।
कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
बिपति कसौटी जे कसे, तो ही साँचे मीत।।
छिमा बड़न को चाहिए, छोटेन को उतपात।
का रहिमन हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात।।
भाग–2
2.तुलसीदास के समय और रचना संसार का परिचय दीजिए।
3.‘सूरदास के काव्य में लोकोजीवन’ विषय पर विचार कीजिए।
4.निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए :
(क) विद्यापति की भक्ति का स्वरूप
(ख) ‘जायसी की कविता में श्रृंगार
भाग–3
4.रहीम की काव्यभाषा और काव्य रूप पर प्रकाश डालिए।
5.रसखान की कविता में निहित प्रेम और भक्ति की विशिष्टताओं को रेखांकित कीजिए।
6.निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए :
(क) बिहारी की कविता का भाव पक्ष
(ख) मीरा की कविताओं में भक्ति भावना

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