Description
बी.एस.ओ.ई.-142 : भारतीय समाजशास्त्रीय परंपराएँ
अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य
कार्यक्रम कोड : BASOH
पाठ्यक्रम कोड: BSOE-142
सत्रीय कार्य कोड : बी.एस.ओ.ई.-142 /ए.एस.एस.टी./TMA/2026-27
अधिकतम अंक: 100
नोट: यह सत्रीय कार्य तीन भागों में विभाजित हैं।
सत्रीय कार्य – I
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंकों का है।
1. भारतीय समाज को समझने के संदर्भ में डी.पी. मुखर्जी तथा ए.आर. देसाई के समाजशास्त्रीय दृष्टिकोणों की तुलना कीजिए।
2. बेनॉय कुमार सरकार के योगदान के संदर्भ में भारतीय समाजशास्त्रीय चिंतन की सामाजिक पूर्ववृत्तियों (Social Antecedents) की चर्चा कीजिए।
सत्रीय कार्य – II
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 250 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 10 अंकों का है।
3. एम.एन. श्रीनिवास द्वारा प्रतिपादित संस्कृतिकरण (Sanskritization) तथा पाश्चात्यीकरण (Westernization) की अवधारणाओं के संदर्भ में सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
4. भारतीय समाजशास्त्रीय परंपराओं के विकास में नारीवादी समाजशास्त्रियों के योगदान की चर्चा कीजिए।
5. भारत में राष्ट्रवाद की समझ के संदर्भ में ए.आर. देसाई के दृष्टिकोण की व्याख्या कीजिए।
सत्रीय कार्य – III
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न 6 अंकों का है।
6.भारतीय समाजशास्त्र में इंडोलॉजिकल (Indological) दृष्टिकोण क्या है?
7.समाजशास्त्र के बॉम्बे स्कूल (Bombay School of Sociology) पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
8.भारत की जनजातियों के संबंध में जी.एस. घुर्ये के क्या विचार थे?
9.‘भारतीय समाजशास्त्र का समाजशास्त्र’ से रामकृष्ण मुखर्जी का क्या आशय था? इसकी प्रमुख विशेषताओं की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए।
10.इरावती कर्वे के दृष्टिकोण के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि जाति किस प्रकार नातेदारी (Kinship) संगठन को प्रभावित करती है।



Reviews
There are no reviews yet.