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पाठ्यक्रम: गांधी का राजनीतिक चिंतन (एम जी पी–004)
अध्यापक जाँच सत्रीय कार्य
सत्रीय कार्य कोड : एम जी पी–004 / ए एस एस टी / टी एम ए / 2025–26
पूर्णांक: 100
आपको कुल पाँच प्रश्न करने हैं, प्रत्येक भाग में से कम से कम दो प्रश्नों का चयन करना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द–सीमा लगभग 500 शब्द है। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक का है।
भाग – I
1.स्वशासन से गांधी का क्या तात्पर्य है? स्वशासन की स्थापना के लिए अभिजात वर्ग (elite) और जनसामान्य (masses) के बीच की खाई को पाटने (bridge) की आवश्यकता पर गांधी क्यों बल देते हैं?
2.गांधी समानता को सर्वोच्च मूल्य क्यों मानते हैं? आर्थिक समानता प्राप्त करने के लिए गांधी क्या उपाय प्रस्तावित करते हैं?
3.औपनिवेशिकता (colonialism) और साम्राज्यवाद (imperialism) का राज्य तथा उसके नागरिकों और उनके सामाजिक-आर्थिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
4.उदारवाद (liberalism) और संविधानवाद (constitutionalism) को आत्मसात (imbibing) करने में गांधीवादी चिंतन-प्रक्रिया की विशिष्टता (uniqueness) का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
5.नैतिक प्रेरणा (moral persuasion) और नैतिक स्वायत्तता (ethical autonomy) के माध्यम से विकेंद्रीकृत, अहिंसक शासन के पक्ष में गांधी ने समाजवाद और साम्यवाद की सर्वसत्तावादिता (totalitarianism), वर्ग संघर्ष, हिंसा तथा राज्य-दमन (state-coercion) को राजनीतिक रूप से किस प्रकार अस्वीकार किया?
भाग – II
प्रश्न के प्रत्येक भाग पर लगभग 250 शब्दों में टिप्पणी कीजिए :
6.(क) ब्रिटिश संस्थाओं के प्रति गांधी के प्रशंसा-भाव के कारण।
(ख) नागरिकता पर गांधी के विचार।
7.क) ‘ग्राम स्वराज’ की गांधी की अवधारणा।
ख) सत्याग्रह में व्यक्ति की भूमिका।
8.क) साध्यों की प्राप्ति हेतु साधनों की पवित्रता।
ख) शक्ति की गांधी की अवधारणा।
9.क) अराजकतावादी (anarchist) समाज में प्राधिकार (authority) की भूमिका।
ख) गांधी के शांतिवाद (pacifism) में परिवर्तन।
10.क) फासीवाद पर गांधी के विचार।
ख) संरचनात्मक हिंसा पर गांधी के विचार।





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