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सत्रीय कार्य
MSK–003 दर्शन: न्याय, वेदान्त, सांख्य और मीमांसा
पाठ्यक्रम कोड – MSK: 003
पाठ्यक्रम शीर्षक – दर्शन: न्याय, वेदान्त, सांख्य और मीमांसा
सत्रीय कार्य – MSK–003/TMA/2025–2026
पूर्णांक – 100
नोट – सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
1.अधोलिखित में से किसी तीन की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए :
(क) प्रतिविषयाध्यवसायो दुष्टं त्रिविधममुमानमाख्यातम्।
तल्लिड़्गलिड़्गीपूर्वकमाप्तश्रुतिराप्तवचनन्तु॥
(ख) हेतुमदनित्यव्याप्ति, सक्रियमनेकोमाश्रितं लिङ्गम्।
सावयवं परतन्त्रम् व्यक्तं, विपरीतमव्यक्तम्॥
(ग) अध्यवसायो बुद्धिर्धर्मो ज्ञानं विराग ऐश्वर्यं।
सात्त्विकमेतद्रूपं तामसमस्माद्विपर्यस्तम्॥
(घ) ऊह: शब्दोअ्ययनं दुःखविघातास्त्रय: सुहृत्प्राति:।
दानं च सिद्धयोय्ष्टौ सिद्धे:पूर्वोअ्ड़कशस्त्रिविधः॥
(ङ) तत्र जरामरणकृतं दुःखं प्राप्नोति चेतन: पुरुषः।
लिङ्गःस्याविनिवृत्तेस्तस्माद् दुःखं स्वभावेन॥
(च) वत्सविवृद्धिनिमितं क्षीरस्य यथा प्रवृत्तिरज्ञस्य।
पुरुषविमोक्षनिमित्तं तथा प्रवृति: प्रधानस्य॥
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
- वेदान्त के अनुभवचतुष्ट्य की विवेचना कीजिए।
- साधनचतुष्ट्य को स्पष्ट कीजिए।
- परिणामवाद एवं विवर्तवाद में भेद स्पष्ट कीजिए।
- वेदान्तविद्या का अधिकारी होने के लिए क्या अपेक्षित है।
- गुणत्रय का निरूपण कीजिए।
- सांख्य के अनुसार सृष्टि कितने प्रकार की होती है।
- कर्म कितने प्रकार के होते हैं; स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी दो के उत्तर लगभग 1000 शब्दों में लिखिए।
- नासतो विद्यते भावो नाय्भावो विद्यते सतःय इस उक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए तथा कार्य उत्पत्ति की पाँच युक्तियों की चर्चा कीजिए।
- भारतीय दर्शन परम्परा में अनन्मभट्ट के योगदान को रेखांकित कीजिए।
- धर्म का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसकी भावना तथा वेद की अपौरुषता पर प्रकाश डालें।






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