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सत्रीय कार्य
MSK–001 संस्कृत साहित्यशास्त्र एवं साहित्य
पाठ्यक्रम कोड – MSK: 001
पाठ्यक्रम शीर्षक – संस्कृत साहित्यशास्त्र एवं साहित्य
सत्रीय कार्य – MSK – 001/TMA 2025–2026
पूर्णांक – 100
नोट – सभी प्रश्न अनिवार्य हैं : –
- अधोलिखित में से किन्हीं तीन की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए :–
3×20 = 60
(क) तस्य स्थित्वा कथमपि पुरः कौतुकाधानहेतो।
रत्नार्बाष्पश्चिरमनुचरो राजराजस्य दध्यौ॥
मेघालोके भवति सुखिनोअ्प्यन्यथावृत्ति चेत:।
कण्ठान्लेषप्रणयिनि जने किं पुनर्दूरसंस्थे॥
(ख) छन्नोपान्त: परिणफलद्योतिभिः काननाम्रै।
स्त्वय्यारूढे शिखरमच: स्निग्धवेणीसवर्णे॥
नूनं यास्यत्यमरमिथुनप्रेक्षणीयामवस्थां।
मध्ये श्याम: स्तन इव भूद: शेषविस्तारपाण्डुः॥
(ग) प्रद्योतस्य प्रियदुहितरं वस्सराजोऽत्र जहृ।
हैमं तालद्रुमवनमभूदत्र तस्यैव राज्ञ:॥
अत्रोद्भ्रान्तः किल नलगिरिः स्तभमुत्पाट्य दर्पा।
दित्यागान्त्तून् रमयति जनो यत्र बन्धुनभिज्ञ:॥
(घ) श्यामास्वदृशां, चकितहरिणीप्रेक्षणा दृष्टिपातां।
वक्रच्छायां शशिनि, शिखिना बर्हिभारेषु केशान्॥
उपस्थास्यामि प्रातनुत्तु नदीवीचीषु भूमिलासान्।
हन्तेकोस्मिन्कवचिदपि न ते चणिः! साधुष्यमस्ति॥
(च) यत्रोन्मत्तभ्रमरमुखरा: पादपा नियरुष्पाः।
हंसश्रेमीरीचितशना नियपद्मा नलिनैः॥
ककोऽकुण्ठा भवनशिखिना नियभास्करकला पा।
नियज्योत्स्नाः: प्रहितततमोगृस्तिर्याः: प्रदोषाः॥
2.निम्नलिखित में से किसीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
(क) महाकाव्य की परिभाषा तथा महाकाव्य के उद्भव और विकास पर प्रकाश डालें।
(ख) कथासाहित्य का उद्भव कैसे हुआ? विस्तारपूर्वक प्रकाश डालें।
(ग) रस—निर्णय पर प्रकाश डालें।
(घ) काव्य की परिभाषा देते हुए काव्य प्रयोजन का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
3.निम्नलिखित में से किन्हीं दो का चरित्र–चित्रण कीजिए।
(क) वासवदत्ता (ख) चारुदत्त
(ग) यक्ष (घ) शाकार
4.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए।
(क) बुद्ध चरितम् (ख) नायिका भेद
(ग) रूपक (घ) अर्थशेषपक






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