Description
MJY-003 पञ्चांग एवं मुहूर्त
(सत्रीय कार्य)
पाठ्यक्रम कोड : MJY-003
सत्रीय कार्य कोड : MJY-003 / 2024-25
कुल अंक : 100
नोट : यह सत्रीय कार्य 02 खण्डों में विभक्त है। सभी खण्ड अनिवार्य हैं। 15 अंक के प्रश्नों का विस्तृत उत्तर दीजिए। 10 अंक के प्रश्नों का लगभग आठ सौ शब्दों में उत्तर देना है।
खण्ड—1
निर्देश– निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दीजिए :
1.पंचांग के सैद्धान्तिक स्वरूप का उल्लेख कीजिए।
2.ज्योतिष शास्त्र में पंचांग की उपयोगिता का वर्णन कीजिए है।
3.पत्रपांचांग साधन के आलोक में नक्षत्र साधन का वर्णन कीजिए।
4.भारतीय पंचांग के उद्भव एवं विकास का विस्तार पूर्वक वर्णन कीजिए।
5.ज्योतिष शास्त्र में मुहूर्त विचार की आवश्यकता का विवेचन कीजिए।
6.व्रत, पर्व एवं उत्सव का धर्मशास्त्रीय निर्णय करने में तिथि निर्णय की भूमिका का विस्तार से उल्लेख कीजिए।
7.योगसाधन का विस्तार से उल्लेख कीजिए।
खण्ड–2
निर्देश: अधोलिखित प्रश्नों में से किन्ही चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1.करण साधन का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
2.संस्कारों की आवश्यकता का उल्लेख कीजिए।
3.वेद प्रतिपादित पंचांग परम्परा का उल्लेख कीजिए।
4.उत्सव निर्धारण में ज्योतिष शास्त्र की क्या भूमिका है?
5.पर्व निर्धारण में ज्योतिष शास्त्र की क्या भूमिका है?
6.तिथि साधन का उल्लेख कीजिए।
7.पंचांग के अंगों का वर्णन कीजिए।
8.मुहूर्त की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।






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