Description
एम.एच.डी.–19
हिंदी दलित साहित्य का विकास
सत्रीय कार्य
(पूरे पाठ्यक्रम के सभी खंडों पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : एम.एच.डी.–19/एम.ए.
पाठ्यक्रम शीर्षक : हिंदी दलित साहित्य का विकास
सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी.–19/टी.एम.ए./2026–2027
कुल अंक : 100
1. निम्नलिखित काव्यांशों में सभी की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 10×3 = 30
(क) यदि वेदों में लिखा होता
ब्रह्म के पैर से हुए हैं पैदा।
उन्हें उपनयन का अधिकार नहीं
तब, तुम्हारी निष्ठा क्या होती?
(ख) बंद किले से बाहर
झाँक कर तो देखो
बरफ पिघल रही है।
बछड़े मार रहे हैं फुर्री
बैल धूप चबा रहे हैं
और एकलव्य पुराने जंग लगे तीरों को
आग में तपा रहा है।
(ग) स्त्री साँग करती है कि—
मुझे अनन्त असीम दिगन्त चाहिए
छत का खुला आसमान नहीं
आसमान की खुली छत चाहिए।
मुझे अनन्त आसमान चाहिए।
2. निम्नलिखित में सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(क) विद्रोहिणी कविता में कौन सा स्वर और संवेदना दिखाई देती है?
(ख) पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी की मूल संवेदना और कथा शिल्प पर टिप्पणी करें।
(ग) आमने सामने कहानी में गाँवों की किस छवि पर लेखक ने पाठकों का ध्यान खींचा है?
(घ) अपने अपने पिंजरे आत्मकथा के मूल तत्वों पर प्रकाश डालें।
3. निम्नलिखित में सभी प्रश्नों के उत्तर लगभग 300 शब्दों में लिखिए :
(क) दलित आत्मकथा की विशेषता
(ख) आज का संदेश कविता में मूल संवेदना







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