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सत्रीय कार्य : BSKG-173 आधार संस्कृत
सत्रीय कार्य – BSKG-173/TMA/2026-27
पूर्णांक – 100
नोट – इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
प्रश्न – 1 संस्कृत भाषा में कारकों का परिचय देते हुए उनके प्रयोगों का वर्णन कीजिए। 10
प्रश्न – 2 निम्न में से किन्हीं पाँच के उत्तर लिखिए। 10
i) विभक्ति और कारक में क्या अन्तर है?
ii) वाच्य कितने प्रकार के होते हैं?
iii) लट् लकार किस काल का बोध कराता है?
iv) संस्कृत में सप्तमी विभक्ति का एक प्रयोग लिखिए।
v) कर्तृवाचक का एक उदाहरण लिखिए।
vi) तुमुन् प्रत्यय का प्रयोग किस अर्थ में होता है?
प्रश्न – 3 कोष्ठक में से उचित विकल्प का चयन कीजिए। 10
i) बालिका _______ लिखति। (पत्रम् / पत्रे / पत्रस्य)
ii) अहं विद्यालयं _______। (गच्छामि / गच्छति / गच्छसि)
iii) रामः _______ जलं पिबति। (पात्रेण / पात्रम् / पात्रस्य)
iv) त्वं किं _______? (करोषि / करोति / कुर्वन्ति)
v) गुरुः _______ उपदिशति। (शिष्याय / शिष्यः / शिष्यम्)
प्रश्न – 4 निम्नलिखित धातुओं के निर्देशानुसार रूप लिखें। 10
i) गम् — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
ii) पठ् — लोट् लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन
iii) कृ — लृट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
iv) सेव् — लङ् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन
iv) सेव् — लङ् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन
v) भू — लट् लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन
प्रश्न – 5 निम्नलिखित में से पाँच वाक्यों का संस्कृत अनुवाद कीजिए।
i) बालक विद्यालय जाता है।
ii) मैं जल पीता हूँ।
iii) किसान खेत में कार्य करता है।
iv) तुम सत्य बोलो।
v) वे पुस्तक पढ़ेंगे।
vi) हमें गुरु का सम्मान करना चाहिए।
प्रश्न – 6 निम्नलिखित में से पाँच वाक्यों का वाच्यपरिवर्तन कीजिए।
i) रामः पत्रं लिखति।
ii) सीता गीतं गायति।
iii) बालकः फलं खादति।
iv) अहं संस्कृतं पठामि।
v) त्वं पुस्तकं पठसि।
vi) वयं विद्यालयं गच्छामः।
प्रश्न – 7 निम्नलिखित धातुओं से निर्देशानुसार प्रत्यय लगाकर शब्द लिखें ।
i) कृ + त्वा =
ii) दृश् + त्वा =
iii) लिख् + तुमुन् =
iv) ज्ञा + तुमुन् =
v) नी + क्त (स्त्रिलिङ्ग) =
प्रश्न – 8 निम्नलिखित पदों में नामोल्लेख पूर्वक सन्धि कीजिए ।
i) देव + आलयः:
ii) रामः + अस्ति
iii) महा + उत्सवः
iv) विद्यालयः (सन्धि-विच्छेद)
v) तदेव (सन्धि-विच्छेद)
प्रश्न – 9 निम्नलिखित श्लोकों में से किन्हीं दो की व्याख्या कीजिए ।
i) एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते
ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः ॥
ii) यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः ।
हर्षामर्षभयोद्वेगैर्मुक्तो यः स च मे प्रियः ॥
iii) क्लेशोऽधिकतरस्तेषामव्यक्तासक्तचेतसाम् ।
अव्यक्ता हि गतिर्दुःखं देहवद्भिरवाप्यते ॥
प्रश्न – 10 प्रश्न संख्या 9 में दिए गए श्लोकों में अधोरेखित तीन पदों की सन्धि, क्रियारूप, विभक्ति तथा कारक आदि बताएं ।



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