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BHDC-109 2026-27 SOLVED ASSIGNMENT

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हिंदी उपन्यास
(BHDC-109)
सत्रीय कार्य
पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.सी.–109
सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.सी.–109/टीएमए/2026–2027

Description

हिंदी उपन्यास
(BHDC-109)
सत्रीय कार्य
पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.सी.–109
सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.सी.–109/टीएमए/2026–2027
कुल अंक 100
नोट : सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भाग—क
1. निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।
10×4 = 40
(क)
जीवन-रंगशाला का वह निर्दय सूत्रधार किसी अज्ञात किसी अगम गुप्त स्थान पर बैठा हुआ अपनी जटिल क्रूर क्रीड़ा दिखा रहा है। यह कौन जानता था कि नकल असल होने जा रही है, अभिनय सत्य एक रूप धारण करने वाला है। निशा ने इन्दु को परास्त करके अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था। उसकी पैशाचिक सेना ने प्रकृति पर आतंक जमा रखा था। सद्वृत्तियाँ मुँह छिपाये पड़ी थीं और कुवृत्तियाँ विजय-गर्व से इठलाती फिरती थीं।
(ख)
बहुत कुछ जो इस दुनिया में हो रहा है वह वैसा ही क्यों होता है, अन्यथा क्यों नहीं होता—इसका क्या उत्तर है? उत्तर हो अथवा न हो, पर जान पड़ता है भवितव्य ही होता है। नियति का लेख बँधा है। एक भी अक्षर उसका यहाँ से वहाँ न हो सकेगा। वह बदलता नहीं, बदलेगा नहीं। पर विधि का वह अतर्क्य लेख किस विधाता ने बनाया है, उसका उसमें क्या प्रयोजन है—यह भी कभी पूछकर जानने की इच्छा की जा सकती है, या नहीं। शायद नहीं। ज्ञानी जन कुछ ग्रन्थों से फिर परम कल्याणमय हुई इस सृष्टि में अपनी परम लीला का विस्तार कर रहा है। मैं मान लेता हूँ कि ऐसा ही है। न मानूँ तो जीऊँ कैसे?
(ग)
सीताराम की गुहार बाबा के कानों में से ऐसे पड़ी जैसे कोई अंधा बंद गली में चलते-चलते दीवार से टकराकर अपना सिर चुटीला कर ले। मन को पछतावा हुआ, ‘हे प्रभु, तुम्हारी यह माया ऐसी है कि जन्म भर जप–तप साधन करते–करते पच मरो तब भी इससे पार पाना उस समय तक महा कठिन है जब ताकि कि तुम्हारी ही पूर्ण कृपा न हो। सुनता हूँ, विचारता हूँ, समझता भी हूँ, यहाँ तक कि अब तो दूसरों को विचार से समझा भी लेता हूँ, पर मौके पर यह सारा किया–धरा–चौपट हो जाता है।’
(घ)
मरने के समय वह चिर स्थिर था, शांत था, अडिग और निर्भय। वह सब में रम रहा है, मेरे और जल्लाद के भीतर यही है, जल्लाद की तलवार और मेरे सिर में भी यही है। सब बराबर है। लाठी और अटल में वही है। दोनों में वही है? फिर मैंने उन दोनों के बीच में भेद क्यों किया? पर वह तो वर्णाश्रम की बात थी। जो कुछ भी हो, अब किसी के लिए मन में कोई बुराई नहीं। सिकन्दर के लिए नहीं, मौलवियों के लिए नहीं, किसी के लिए नहीं।
भाग—ख
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 750–800 (प्रत्येक) शब्दों में दीजिए।
15×3 = 45
(1). ‘मृगनयनी’ का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए। ।
(2). जैनेन्द्र के उपन्यासों का परिचय दीजिए।
(3). ‘आपका बंटी’ के आधार पर शकुन की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
भाग—ग
3. निम्नलिखित पर लगभग 250 (प्रत्येक) शब्दों में टिप्पणी लिखिए :
5×3 = 15
(1) मुंशी तोताराम का चरित्र
(2) ‘त्यागपत्र’ की भाषा
(3) ‘आपका बंटी’ का परिवेश

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