Description
सत्रीय कार्य
संपूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित
बी.एच.डी.ई.-144 : छायावाद
पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.ई.-144/BAG
सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.ई.-144 / 2026–2027
कुल अंक : 100
नोट : सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
खंड — क
1. निम्नलिखित पद्यांशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिए : 10×4 = 40
(क) हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह
एक पुरुष, भीगे नयनों से, देख रहा था प्रलय प्रवाह !
नीचे जल था, ऊपर हिम था, एक तरल था एक सघन,
एक तत्त्व की ही प्रधानता, कहो उसे जड़ या चेतन।
(ख) जुही की कली
विजन-वन-वल्लरी पर
सोती थी सुहाग-भरी-स्नेह-स्वप्न-मग्न—
अमल-कोमल-तनु तरुणी — जुही की कली,
दृग बन्द किये, शिथिल, — पत्रांक में,
वासन्ती निशा थी।
विरह-विधुर-प्रिया-संग छोड़
किसी दूर देश में था पवन
जिसे कहते हैं मलयानिल।
(ग) नौका से उठतीं जल-हिलोर,
हिल पड़ते नभ के ओर-छोर!
विस्फारित नयनों से निश्चल कुल खोज रहे चल तारक दल
ज्योतित कर नभ का अन्तरतल:
जिनके लघु दीपों को चंचल, अंचल की ओट किये अविरल
फिरती लहरें लुक-छिप पल-पल!
सामने शुक्र की छवि झलमल, पैरती परी-सी जल में कल,
रूपहरे कणों में हो ओझल!
लहरों के घूँघट से झुक-झुक, दशमी का शशि तिर्यक्-मुख
दिखलाता, मुग्धा-सा रुक-रुक।
(घ) सौरभ फैला विपुल धूप बन,
मृदुल मोम सा धुल रे मृदु तन्य
दे प्रकाश का सिन्धु अपरिमित,
तेरे जीवन का अणु गल-गल!
पुलक-पुलक मेरे दीपक जल!
खंड — ख
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में उत्तर दीजिए :
2. छायावाद की शक्ति और सीमाओं पर प्रकाश डालिए।
3. जयशंकर प्रसाद के काव्य में राष्ट्रीय चेतना और मानवीयता पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
4. निराला की काव्य-भाषा की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
5. महादेवी वर्मा के काव्य की अन्तर्वस्तु को समझाइए।
खंड — ग
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में उत्तर दीजिए : 5×4 = 20
6. छायावाद की पृष्ठभूमि पर टिप्पणी लिखिए।
7. जयशंकर प्रसाद के काव्य में प्रकृति चित्रण को स्पष्ट कीजिए।
8. निराला की काव्य संवेदना पर संक्षेप में टिप्पणी लिखिए।
9. पंत के काव्य में नारी भावना के मूल वैशिष्ट्य को बताइये।



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