Description
एम.एच.डी.-01
आदि काव्य, भक्ति काव्य एवं रीति काव्य
सत्रीय कार्य (2026-2027)
पाठ्यक्रम कोड : एम.एच.डी.-01 / एम.ए.
पाठ्यक्रम शीर्षक : आदि काव्य, भक्ति काव्य एवं रीति काव्य
सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी.-01 / टी.एम.ए / 2026-2027
कुल अंक : 100
खंड – 1
नोट : सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
1.पृथ्वीराज रासो में कथानक रूढ़ियों का उपयोग किस प्रकार किया गया है?
2.कनवज्ज समय के षट्-ऋतु वर्णन का क्या महत्व है ?
3.विद्यापति की भाषा की विशेषताओं का विवेचन कीजिए ।
4.संतकाव्यधारा के प्रतिनिधि के रूप में कबीर के काव्य पर सिद्धों तथा नाथों के प्रभाव की विवेचना कीजिए ।
5.कवि के रूप में जायसी का मूल्यांकन कीजिए ।
6.सूर काव्य में प्रगीतात्मकता पर विस्तार से चर्चा कीजिए ।
7.मीरा के काव्य में पुरुषसत्तात्मकता और रूढ़िवादिता का तीखा विरोध मिलता है, कथन की विवेचना कीजिए ।
8.तुलसीदास की विचारधारा का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए ।
9.‘मुक्तक कविता में जो गुण होना चाहिए वह बिहारी के दोहों में अपने चरम उत्कर्ष को पहुँचा है।’
इस कथन के आलोक में बिहारी की कविता का विश्लेषण कीजिए।
10.निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए :
क. धनानंद की प्रेमानुभूति
ख. पद्माकर के काव्य में श्रृंगार






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