Description
एम. एच. डी.–12
भारतीय कहानी
सत्रीय कार्य
(सभी खंडों पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : MHD/MAHD –12
सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी.–12 / टी.एम.ए. / 2026–2027
कुल अंक : 100
सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1.निम्नलिखित में से किन्हीं दो की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए:
(क) वह मेरी ओर ही देख रहा था। मेरा प्रश्न सुनकर हँसते हुए मुँह मोड़कर पूछा “क्यों मालिक?” मुझे बड़ा अपमान सा लगा, शर्म भी लगी। मेरे मन में क्षण भर को असमंजस-सा हुआ कि वह लड़का मेरे प्रश्न में कोई दुराभिप्राय खोज रहा है। लक्ष्मी के अतिरिक्त मेरे जीवण में और कोई नहीं है, यह बात वह मूर्ख कैसे जाने। उसने जो व्यंग्यपूर्वक हँसकर ‘क्यों मालिक?’ पूछ ही डाला।
(ख) मगर अविनाश को क्या यह सब पता नहीं था। वे जानते थे कि ये सब मन खराब करने वाली खबरें छूत की तरह हैं। काम के वक्त शैलबाला के पास ऐसे समाचारों पर कान देने का वक्त नहीं होता। अविनाश कहते, नहीं इसलिए तो कह रहा हूँ कि इस जमाने में आदमी को जिंदा बचे रहना ही सबसे बड़ा आश्चर्य है। फिर वे लगे हाथ कहते, खुशबू तो बहुत अच्छी आ रही है। लगता है, हलवा बन रहा है।…… आलू–मिर्च बन रही हो क्या?…… लगता है अंडा भुजिया बना रही हो। किसके लिए बना रही हो? डालडा में बना रही हो कि सरसों तेल में? खुशबू तो अच्छी आ रही है।
(ग) राजा तो राजा ही होता है। जन-जन का मालिक। सिर का मुकुट। किसीकी मजाल जो राजा के आदेशों को टाल सके? नहीं अगर स्वयं मौत भी आयेगी, पर राजा को तो सपने में भी ऐसी मर्जी नहीं होती। राज के गुमान में गोरा ने ठाकुरा घोंघो दिया गया है। पुतलियों की रंगत बदल गई। गरजते हुए ठाकुर पर ही बरस पड़ा, “ठाकुर, तुम्हारी अकल और जबान तो ठिकाने हैं? किसके सामने क्या बकते हो, कुछ होश भी है? सरकार के आदेश से बेपरवाह नालायक तुम्हारे यहाँ फल-फूल रहे हैं। और तुम ठाकुर कहलाते हो?”
2. ‘टेड्रिल’ कहानी के आधार पर मालिक–कर्मचारी के संबंध पर एक निबंध लिखिए।
3.‘अपना–अपना कर्ज़’ कहानी की मूल संवेदना स्पष्ट कीजिए।
4.‘टोबा टेक सिंह’ कहानी का विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए।
5.‘बघेई’ कहानी में चित्रित सामाजिक जीवन पर चर्चा कीजिए।
6.‘विद्रोह’ कहानी की कथावस्तु पर प्रकाश डालिए।






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