Description
अध्यापक जांच सत्रीय कार्य
पाठ्यक्रम का कोड : बी. सी. ओ. जी. -171
पाठ्यक्रम का शीर्षक : व्यष्टि अर्थशास्त्र के सिद्धांत
सत्रीय कार्य का कोड : बी.सी.ओ.जी.-171/टी. एम. ए./2026- 27
खण्डों की संख्या : सभी खण्ड
अधिकतम अंक : 100
सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
खण्ड – क (सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 10 अंक का है)
1. एकाधिकारीप्रतियोगिता की संकल्पना को भली भांति स्पष्ट करें। बाजार में फर्मों के निर्बाध प्रवेश संबंधी कठिनाइयाँ किन कारणों से पैदा होती है?
2. अनुमानित प्रतिफल से आपका क्या अभिप्राय है? बड़े पैमाने की किफायतों तथा अलाभ की व्याख्या करें।
3. मांग अनुसूची और मांग वक्र की सहायता से मांग के नियम की व्याख्या करें।
4. सीमांत लागत की अवधारणा को परिभाषित कीजिए। औसत लागत तथा सीमांत लागत के बीच क्या संबंध है? उपयुक्त आरेखों का प्रयोग कीजिए।
5. समसीमांत उपयोगिता का नियम बताइए। इसकी सीमाओं की चर्चा कीजिए।
खण्ड – ख (सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 6 अंक का है)
6.किसी अर्थव्यवस्था की मूल/मुख्य केंद्रीय समस्याओं को स्पष्ट कीजिए।
7.पूर्ति की लोच क्या है? पूर्ति की लोच को निर्धारित करने वाले महत्वपूर्ण कारकों पर चर्चा करें।
8.अधिमान वक्र को परिभाषित करें। अधिमान वक्र की मान्यताओं की व्याख्या करें।
9.पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाज़ार को परिभाषित करें। पूर्ण प्रतिस्पर्धी की विशेषताओं को समझाएँ।
10.मजदूरी बढ़ाने की तीन विधियों पर चर्चा करें।
खण्ड – ग (सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है)
11.उत्पादन के साधनों से आप क्या समझते हैं? उनके चार मुख्य तत्वों को संक्षेप में समझाएं।
12.व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र के बीच अंतर बताइए।
13.मांग की कीमत लोच से क्या अभिप्राय है? मांग की कीमत लोच के निर्धारकों को संक्षेप में समझाएं।
14.उत्पादन का सिद्धांत क्या है? विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन के सिद्धांत की प्रासंगिकता की व्याख्या कीजिए।



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