Description
TEE जून 2026 और दिसंबर 2026 के लिए असाइनमेंट
BPYC-131
भारतीय दर्शन
नोट:
1.सभी पाँच प्रश्नों के उत्तर दें।
2.सभी पाँच प्रश्नों के अंक समान हैं।
3.प्रश्न संख्या 1 और 2 का उत्तर लगभग 400 शब्दों में होना चाहिए।
1.महाभारत में परिलक्षित दार्शनिक तत्त्वों और नैतिक विचारों का विश्लेषण करें।
अथवा
सांख्य के कार्य–कारण सिद्धांत की विस्तृत व्याख्या करें।
2.माध्वाचार्य और रामानुजाचार्य के ईश्वर संबंधी (theistic) सिद्धांतों पर चर्चा करें।
अथवा
ज्ञान के स्रोत के रूप में अनुमान पर चर्चा करें और इसे प्रमाण के रूप में मान्यता देने पर चार्वाक की आपत्ति का विश्लेषण करें।
3.निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में दें।
क) वैशेषिक दर्शन द्वारा प्रस्तावित अभाव की अवधारणा को समझाएँ।
ख) कठोपनिषद में आत्मा के विचार की जाँच करें।
ग) योग दर्शन में चर्चा की गई चित्त-वृत्ति की अवधारणा को समझाएँ।
घ) सांख्य प्रकृति के अस्तित्व को कैसे स्थापित करता है?
4.निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।
क) न्याय के असत्कार्यवाद सिद्धांत को समझाएँ।
ख) जैन दर्शन में स्याद्वाद के सिद्धांत पर एक टिप्पणी लिखें।
ग) प्रतीत्यसमुत्पाद के दार्शनिक निहितार्थों पर चर्चा करें।
घ) कश्मीर शैववाद में ‘सत्’ (Reality) की अवधारणा पर एक टिप्पणी लिखें।
ङ) उछल्लक की व्याख्या में तत्पर्य का क्या अर्थ है?
च) अध्यात्मवाद क्या है?
- निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच पर लगभग 100 शब्दों में संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
क) दर्शन
ख) पराविद्या
ग) अभाव
घ) नित्यविभूति
ङ) श्रुति
च) शून्यवाद
छ) समवाय
ज) असम्प्रज्ञात समाधि



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