Description
एम.एच.डी.–24 : मध्ययुगीन कविता–1
सत्रीय कार्य
(सभी खंडों पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : एम.एच.डी.–24
सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी.–24 / टी.एम.ए. / 2025–26
कुल अंक : 100
1.“निम्नलिखित पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए”
(क) रहिमन जिहवा बावरी, कहिगो सरग पताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।।
(ख) मूलन ही की जहाँ अधोगति केशव गाइय।
हौम हुताशन धूम नगर एकै मलिनाइय।
दुर्गति दुरगन ही जु कुटिल गति सरितन ही में।
श्रीफल को अभिलाष प्रगट कवि कुल के जी में।।
(ग) वरज्यो न मानत हो बार–बार वरज्यो मैं,
कौन काम, मेरे इत भौन मैं न आए;
लाज को न लेस, जग हाँसी को न डर मन,
हँसत–हँसत आन बात न बनाए।
(घ) डार द्रुम पलना, बिछौना नवपल्लव के,
सुमन झँगुला सोहै तन छवि भारी दे।
पवन झुलावै, केकी कोर बहारावैं देव,
कोकिल हलावै हुलसावै कर तारी दे।
पूरीत पराग सौं उतारो करैं राई लोन
कंजकली–नायिका लतानी सिर सारी दे।
2.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500–500 शब्दों में दीजिए : 1
(क) नीतिकाव्य परंपरा का परिचय दीजिए।
(ख) रहीम के काव्य की भाषागत विशेषताएँ बताइए।
(ग) मतिराम के प्रकृति वर्णन की विशेषताओं का उदाहरण सहित विवेचन कीजिए।
3.निम्नलिखित विषयों में से प्रत्येक पर लगभग 150 शब्दों में टिप्पणी लिखिए :
(क) कविप्रिया
(ख) परवर्ती कवियों पर ‘देव’ का प्रभाव
(ग) ‘केशवदास’ का आचार्यत्व






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