Description
BHDC-105
(BAFHD)
छायावादोत्तर हिंदी कविता
सत्रीय कार्य
(जुलाई 2025 तथा जनवरी, 2026)
सत्रीय कार्य
(संपूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.सी.–105 / BAFHD
सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.सी.–105 / 2025–26
कुल अंक : 100
नोट : सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
खंड – क
- निम्नलिखित पद्यांशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिए :
(क) माँझी! न बजाओ बंशी मेरा मन डोलता
मेरा मन डोलता है जैसे जल डोलता
जल का जहाज जैसे पल–पल डोलता
माँझी! न बजाओ बंशी मेरा प्रन टूटता
मेरा प्रन टूटता है जैसे तृन टूटता
तृन का निवास जैसे बन–बन टूटता
माँझी! न बजाओ बंशी मेरा तन झूमता
मेरा तन झूमता है तेरा तन झूमता
मेरा तन तेरा तन एक बन झूमता।
(ख) मैं न वह जो स्वप्न पर केवल सही करते,
आग में उसको गला लोहा बनाती हूँ
और उस पर नींव रखती हूँ नये घर की,
इस तरह दीवार फौलादी उठाती हूँ।
मनु नहीं, मनु–पुत्र है यह सामने, जिसकी
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
वाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न के भी साथ हाथ में तलवार होती है।
(ग) द्वीप हैं हम।
यह नहीं है शाप। यह अपनी नियति है।
हम नदी के पुत्र हैं। बैठे नदी के क्रोड़ में।
वह वृहत् भूखंड से हम को मिलाती है।
और वह भूखंड
अपना पिता है।
(घ) -जी नहीं, दिल्लगी की इसमें क्या बात?
मैं लिखता ही तो रहता हूँ दिन–रात,
तो तरह–तरह के बन जाते हैं गीत,
जी, रूठ–रूठ के बन जाते हैं गीत।
जी, बहुत देर लगा गया, हटाता हूँ
गाहक की मर्ज़ी, अच्छा जाता हूँ।
खंड – ख
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए :
2.प्रगतिवाद की अंतर्वस्तु पर विचार कीजिए।
3.प्रयोगवाद की प्रमुख प्रवृत्तियों को रेखांकित कीजिए।
4.समकालीन हिंदी कविता की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
5.अज्ञेय की काव्य–यात्रा के विकास की चर्चा कीजिए।
खंड – ग
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में दीजिए :
6.नागार्जुन की राजनीतिक कविताओं के निहितार्थ स्पष्ट कीजिए।
7.दिनकर की सामाजिक चेतना पर विचार कीजिए।
8.भवानी प्रसाद मिश्र की काव्य–भाषा पर प्रकाश डालिए।
9.‘हम ले चलेंगे’ कविता का मंतव्य स्पष्ट कीजिए।




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