Description
एम.एच.डी.-21 : मीरा का विशेष अध्ययन
सत्रीय कार्य
(सभी खंडों पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : एम.एच.डी.–21
सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी–21 / टी.एम.ए / 2025–2026
कुल अंक : 100
1.निम्नलिखित काव्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए :
(क) जोगिया छाई रह्या परदेस ।
अब का बिछुड़ा फेर न मिलिया, बहोरि न दियो संदेस ॥
या तन ऊपर भसम रमाऊँ, खार करूँ सिर केस ॥
भगवाँ भेष धरूँ तुम कारण, ढूं ढूं चारूँ देस ॥
मीरा के प्रभु गिरधरनागर जीवनि जनम अनेसा ॥
(ख) कृष्ण लगन की पीर रे, हरि लागी सोई जाने।
प्रीत करि कछु रीत न जाणी, छोड़ चले अजबीन।
दुख की बेला कोई काम न आवे, सुख के सब हैं मीता।।
मीरा के प्रभु गिरधरनागर, आखर जात अहीर।।
(ग) अंखियाँ कृष्ण मिलन की प्यासी।
आप तो जाय द्वारका छाये, लोक करत मेरी हँसी।।
आम की डार कोयलिया बोले, बोलत सबद उदासी।।
मेरे तो मन (अब) ऐसी आवे, करवत लेहों कासी।।
मीरा के प्रभु गिरधरनागर, चरणकमल की दासी।।
2.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए :
(i) मीरायुगीन सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का विवेचन कीजिए।
(ii) मीरा के विद्रोह के विविध पक्षों पर विचार कीजिए।
(iii) मीरा की काव्यकला पर प्रकाश डालिए।
3.निम्नलिखित विषयों में से प्रत्येक पर लगभग 150 शब्दों में टिप्पणी लिखिए :
(i) चित्तौड़गढ़ में मीरा का जीवन
(ii) हिन्दी साहित्य के इतिहास ग्रंथों में मीरा
(iii) मुक्ताबाई
(iv) मीरा की विरह वेदना
(v) मीरा और आंदाल की भक्ति







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