Description
BKSC-104
गीता में आत्मप्रबन्धन
(सत्रीय कार्य–2025-26)
पाठ्यक्रम कोड–बी.एस.के.सी–104
पाठ्यक्रमशीर्षक—गीता में आत्मप्रबन्धन
सत्रीय कार्य कोड : BKSC-104/2025-26
पूर्णांक — 100
नोट – इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों का उत्तर लिखें। 15×4 = 60
1.महाभारत का सामान्य परिचय देते हुए गीता के अभिप्राय एवं प्रयोजन का विस्तृत रूप से वर्णन करें।
2.भगवद् गीता कितने अध्यायों में विभाजित है? सभी अध्यायों की विषयवस्तु का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
3.गीता की मुख्य शिक्षाएँ क्या हैं? विस्तृत रूप से वर्णन करें।
4.इन्द्रियों का अभिप्राय, संख्या एवं इन्द्रियों के स्वभाव का विस्तार रूप से वर्णन करें।
5.गीता में वर्णित इन्द्रियनिग्रह का उदाहरण सहित विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
6.स्थितप्रज्ञ का लक्षण क्या है? स्थिति की प्रशंसा का उदाहरण सहित वर्णन करें।
7.पुरुषार्थ चतुष्ट्य की अवधारणा का विस्तारपूर्वक वर्णन क
निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों का उत्तर लिखें। 10×4 = 40
8.मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः।
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत।।
9.इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते।
तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि।।
10.कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन्।
इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते।।
11.सर्वाणि भूतानि सुखे रमन्ते।
सर्वाणि दुःखेऽथवेजन्ति।।
तेषां भयोत्पादनजायतखेद:।
कुर्यान्न कर्माणि हि जातवेदः।।
12.तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः।
उपविश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मविशुद्धये।।






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