Description
सत्रीय कार्य
MSKE–009 वेद : वैदिक संहिताएं और वैदिक व्याकरण
पाठ्यक्रम कोड – MSKE–009
पाठ्यक्रम शीर्षक – वेद : वैदिक संहिताएं और वैदिक व्याकरण
सत्रीय कार्य – MSKE–009/TMA/2025–2026
पूर्णांक – 100
नोट : यह सत्रीय कार्य 02 खण्डों में विभक्त है। सभी खण्ड अनिवार्य हैं। 15 अंक प्रश्नों का विस्तृत उत्तर दीजिए। 10 अंक के प्रश्नों का लगभग आठ सौ शब्दों में उत्तर देना है।
खण्ड – 1
- निम्नलिखित प्रश्नों में से किसीं छः प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दीजिएः
6×10=60
1.अथर्ववेद की प्रमुख शाखाओं का वर्णन करें।
2.वैदिक साहित्य में कितने प्रकार के वेद बताए गए हैं।
3.अथर्ववेद के सामाजिक व्यवस्था, राजनैतिक व्यवस्था का वर्णन करें।
4.वेदों की अपौरुषेयता और नित्यता पर प्रकाश डालें।
5.वेद का अर्थ स्पष्ट रूप करते हुए वेदों के प्रकार पर प्रकाश डालें।
- वेदों में वर्णित काव्यात्मक सौन्दर्य को स्पष्ट करें।
- मति शब्द के रूढ़ लिखिए।
- वेदकालीन भौगोलिक जीवन का वर्णन करें।
- ऋग्वेद संहिता को स्पष्ट करते हुए उसका काल निर्धारण बताएं।
- वेदों का प्रयोजन क्या है? स्पष्ट करें।खण्ड–2
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दीजिए :
11.शुची ते चक्रे यात्या व्यानो अक्ष आहतः।
अनो मनस्मयं सूर्यरोहत्प्रयति पतिम्।।
12.तच्चक्षुर्देवहितं पुरस्ताच्छुक्रमुच्चरन्त। पश्येम शरदः शत: जीवेम शरदः शतं
शृणुयाम शरदः शतं प्रब्रवाम शरदः शतमदीनाः स्याम शरदः शतं भूयश्च शरदः शतात्।।
13.उच्चा ते जातमन्धसो दिवि सद्भूम्या ददे उग्रं शर्म महि श्रवः।
14.तेनेशितं तेन जातं तदु तस्मिन् प्रतिष्ठितम्।
कालो ह बह्य भूत्वा बिभर्ति परमेष्ठिनम्।।
15.यस्य पूर्व पूर्वजना विचत्रिरे यस्यां देवा असुरानभ्यवर्तयन्।
ग्वामश्वानां वयसश्च विष्ठा भग वचः पृथिवी नो दधातु।।
16.असंबाधं मध्यतो मानवानां यस्या उद्वतः प्रवतः समं बहु।
नानावीर्य ओषधीर्या विभर्ति पृथिवी नः प्रथतां राध्यतां नः।।






Reviews
There are no reviews yet.