Description
MBG-004 अक्षरब्रह्म एवं राजविद्यायोग
(सत्रीय कार्य)
पाठ्यक्रम कोड : MBG-004
सत्रीय कार्य कोड : MBG-004 / 2025–26
कुल अंक : 100
नोट : यह सत्रीय कार्य 02 खण्डों में विभक्त है। सभी खण्ड अनिवार्य हैं। 15 अंक के प्रश्नों का विस्तृत उत्तर दीजिए। 10 अंक के प्रश्नों का लगभग आठ सौ शब्दों में उत्तर देना है।
खण्ड–1
निर्देश – निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी चार प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दीजिए :
15×4 = 60
1.गीता के अनुसार भगवान की सर्वव्यापकता के स्वरूप को स्पष्ट कीजिये।
2.सिद्ध एवं साधन पर प्रकाश डालिये।
3.गीता के अनुसार भक्ति और ज्ञान की समग्रता को विस्तार से स्पष्ट कीजिए।
4.गीता में ज्ञान-विज्ञान के स्वरूप को विस्तारपूर्वक स्पष्ट कीजिए।
5.गीता के अनुसार पूजा के स्वरूप पर विस्तृत लेख लिखिए।
6.अपरा एवं परा प्रकृति पर विस्तार से लिखिए।
खण्ड–2
निर्देश: अधोलिखित प्रश्नों में से किसी चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1.गीता में शरणागति पर संक्षेप में टिप्पणी लिखिए।
2.पुनर्जन्म को गीता के परिप्रेक्ष्य में स्पष्ट कीजिए।
3.गीता के अनुसार मृत्यु के स्वरूप पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
4.अध्यात्म तथा अधिभूत पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
5.सिद्ध के स्वरूप पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
6.गीता के अनुसार ओंकारब्रह्म के स्वरूप पर संक्षिप्त लेख लिखिए।





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