Description
MBG-002 धर्म-कर्म एवं यज्ञ
(सत्रीय कार्य)
पाठ्यक्रम कोड : MBG-002
सत्रीय कार्य कोड : MBG-002 / 2025–26
कुल अंक : 100
नोट : यह सत्रीय कार्य 02 खण्डों में विभक्त है। सभी खण्ड अनिवार्य हैं। 15 अंक के प्रश्नों का विस्तृत उत्तर दीजिए। 10 अंक के प्रश्नों का लगभग आठ सौ शब्दों में उत्तर देना है।
खण्ड–1
निर्देश – निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी चार प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दीजिए :
15×4 = 60
1.कर्म की स्वाभाविक स्थिति पर लेख लिखिए।
2.गीता में अवतार की संकल्पना को विस्तार से स्पष्ट कीजिए।
3.गीता के तीन सोपानों पर निबंध लिखिए।
4.गीता में धर्म एवं अध्याय पर विस्तार से लिखिए।
5.गीता में मोह के मनोविज्ञान पर प्रकाश डालिए।
6.कर्मयोग के दो श्लोकों की अपने अनुसार व्याख्या लिखिए।
खण्ड–2
निर्देश: अधोलिखित प्रश्नों में से किसी चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1.गीता में कर्ताभाव पर संक्षेप में लेख लिखिए।
2.ज्ञानी के स्वरूप को गीता की दृष्टि से संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
3.गीता के अनुसार सगुणब्रह्म पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
4.गीता के अनुसार भगवान की अवधारणा को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
5.गीता के अनुसार इच्छा के स्वरूप पर संक्षेप में टिप्पणी लिखिए।
6.गीतानुसार समता पर संक्षिप्त लेख लिखिए।





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