Description
बी.एच.डी.ई.–144 छायावाद HONORS
सत्रीय कार्य
(जुलाई 2025 एवं जनवरी 2026 सत्र के लिए)
(संपूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.ई.–144 / HONORS
सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.ई.–144 / जुलाई 2025–जनवरी 2026
कुल अंक– 100
सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
खंड–क
निम्नलिखित पद्यांशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिए : 10×4 = 40
(क)
मनन करावेगी तू कितना ? उस निश्चित जाति का जीव,
अमर मरेगा क्या ? तू कितनी गहरी डाल रही है नींव ।
आह घिरेगी हृदय-लहरें, खेतों पर कर्कश-धन-सी,
छिपी रहेगी अंतरतम में, सब के तू निगूढ़ धन – सी ।
(ख)
दिवसावसान का समय
मेघमय आसमान से उतर रही है
वह संध्या- सुंदरी परी-सी
धीरे धीरे धीरे,
तिमिरांचल में चंचलता का नहीं कहीं आभास,
मधुर-मधुर हैं दोनों उसके अधर –
किन्तु गंभीर -नहीं है उनमें हास-विलास ।
(ग) छोड़ दुरमों की मृत छाया,
तोड़ प्रकृति से भी माया,
बाले! तेरे बाल जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन?
भूल अभी से इस जग को!
(घ) जाग तुझको दूर जाना
जाग तुझको दूर जाना
चिर सजग आँखें उनंदी आज कैसा व्यस्त बना!
जाग तुझको दूर जाना!
खंड–ख
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए।
2.छायावाद की अन्तर्वस्तु पर प्रकाश डालिए।
3.जयशंकर प्रसाद के काव्य में नारी भावना के सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।
4.निराला के काव्य में सांस्कृतिक और सामाजिक नवजागरण पर चर्चा कीजिए।
5.सुमित्रानंदन पंत की काव्य चेतना के विकास को समझाइए।
खंड—ग
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में दीजिए।
6.महादेवी वर्मा के काव्य सौन्दर्य पर चर्चा कीजिए।
7.जयशंकर प्रसाद के काव्य इतिहास एवं संस्कृति पर संक्षेप में चर्चा कीजिए।
8.‘निराला’ काव्य के रचना-विधान को समझाइए।
9.‘पंत’ के काव्य में जीवन दर्शन को स्पष्ट कीजिए।





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