Description
सत्रीय कार्य
(संपूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.-ई-142 / BA (Honors)
सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.-ई-142 / 2025–2026
कुल अंक : 100
नोट : सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
खंड — क
1.निम्नलिखित पद्यांशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिए :
क. वर्णन उन्होंने जिस विषय का है किया, पूरा किया;
मानो प्रकृति ने ही स्वयं साहित्य उनका रच दिया।
चाहे समय की गति कभी अनुकूल उनके हो नहीं,
हैं किन्तु निश्चल एक— से सिद्धान्त उनके सब कहीं॥
ख. तुझे मिली हरियाली डाली,
मुझे नसीब कोयरी काली!
तेरा नभ भर में संसार
मेरा दस फुट का संसार!
तेरे गीत कहांवे वाह,
रोना भी है मुझे गुनाह!
देख विषमता तेरी मेरी,
बजा रही तिस पर रण–भेरी!
ग. महलों ने आग, झोपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिंगारी अंतरतम से आई थी,
झांसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटे छाई थी,
मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,
जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
घ. कोशल दिखलाया चालों में।
उड़ गया भयानक भालों में।
निर्भीक गया वह ढालों में,
सरपट दौड़ा करवटों में॥
खंड — ख
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए :
2.आधुनिक युग के महत्व को रेखांकित कीजिए।
3.स्वाधीनता आंदोलन के व्यापक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डालिए।
4.राष्ट्रीयता के विकास में भारतीय कविता के योगदान की चर्चा कीजिए।
5.माखनलाल चतुर्वेदी के काव्य के भावपक्ष पर विचार कीजिए।
खंड — ग
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में दीजिए :
6.बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ की राष्ट्रीय चेतना पर टिप्पणी कीजिए।
7.मैथिलीशरण गुप्त के मानवतावादी दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।
8.‘हमारे पूर्वज’ कविता में अभिव्यक्त कवि के मन्तव्य को रेखांकित कीजिए।
9.‘प्यारे भारत देश’ कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।





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