Description
एम.एच.डी.–02 : आधुनिक हिंदी काव्य
सत्रीय कार्य
पाठ्यक्रम कोड : एम.एच.डी.–02 / (MHD-02)
सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी.–02 / टी.एम.ए. / 2026–27
कुल अंक : 100
सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
1.समाज सुधार की दृष्टि से भारतेंदु की कविताओं के महत्व पर प्रकाश डालिए।
2.”उर्मिला जी को गुप्त जी ने पुनर्जीवित किया है” इस कथन की समीक्षा कीजिए।
3.”वेदना महादेवी के काव्य का स्थायी भाव है।” इस कथन की व्याख्या करें।
4.दिनकर के काव्य में सौंदर्य और प्रेम का स्वर मुखरित हुआ है, सोदाहरण विवेचना कीजिए।
5.निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
(क) रोवहु सब मिलि के आवहु भारत भाई।
हा ! हा! भारत दुर्दशा न देखी जाई।।
सबके पहिले जेहि ईश्वर धन बल दीनो।
सबके पहिले जेहि सभ्य विधाता कीनो।।
सबके पहिले जो रूप रंग रस भीनो।
सबके पहिले विद्याफल जिन गहि लीनो।।
अब सबके पीछे सोई परत लखाई।
हा ! हा ! भारत दुर्दशा न देखी जाई।।
(ख) दुःख की पिछली रजनी बीच
विकसता सुख का नवल प्रभात;
एक परदा यह झीना नील
छिपाये है जिसमें सुख गात।
जिसे तुम समझे हो अभिशाप,
जगत की ज्वालाओं का मूल,
ईश का वह रहस्य वरदान
कभी मत इसको जाओ भूल;
(ग) हमारे निज सुख, दुख निश्वास
तुम्हें केवल परिहास,
तुम्हारी ही विधि पर विश्वास
हमारा चिर आश्वास
आये अनंत हृल्कंप ! तुम्हारा अविरत स्पंदन
सृष्टि शिराओं में सञ्चारित करता जीवन;
खोल जगत के शत-शत नक्षत्रों-से लोचन भेदन करते अहंकार तुम जग का क्षण-क्षण
सत्य तुम्हारी राज यष्टि, सम्मुख नत त्रिभुवन,
भूप अंकिचन,
अटल शान्ति नित करते पालन !





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