Description
एम.एच.डी.–17
भारत की चिंतन परंपराएँ और दलित साहित्य
सत्रीय कार्य (2026.2027)
पाठ्यक्रम कोड : एम.एच.डी.–17 / एम.ए.
सत्रीय कार्य कोड : एम.एच.डी.–17 / टी.एम.ए. / 2026–2027
कुल अंक : 100
(क) निम्नलिखित काव्यांशों की लगभग 200 शब्दों में संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए। 10X04 = 40
1. “जगति क्षयधर्मके मुमुक्षुर्गहं शिवमक्षयं परं तत् ।
स्वजनैर्जयने च तुल्यबुद्धिर्विषयेषभ्यो विनिवृत्तरागदोष ॥
2. अतएवका
कटकादिजन्यं दुःखमेव नरकः ।
लोकसिद्धो राजा परमेश्वरः देहच्छेदो मोक्षः ।
देहात्मवादे च ‘स्थूलोअ्हं, कृशोहं, कृणोडहम्’ इत्यादि सामानाधिकरण्योपपत्तिः ।
‘मम शरीरम्’ इति व्यवहारो राहोः शिर: इत्यादिवदौपचारिकः ॥
3. प्रत्यक्षं
अमनुमानञ्च प्रमाणं हि द्विलत्रणम्।
प्रमेयं तत्र सिद्धं हि न प्रमाणान्तरं भवेत्॥
4. “मक्क
जननेला तारा नेल
येकमैना कर्ता इन्दुल्लेडो
अन्निट परिपूर्ण,
डल्ला मुहम्मद
विश्वदाभिरामा विनुरा वेमा !”
(ख) निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए।
5. बौद्ध धर्म के उदय एवं विकास पर एक संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
6. आर्य नागार्जुन के प्रतीत्य समुत्पाद के महत्व को समझाइए।
7. ‘चार्वाक दर्शन’ जीवन के यथार्थ का दर्शन है, स्पष्ट कीजिए।
8. नाथ पंथी साहित्य की प्रासंगिकता का मूल्यांकन कीजिए।
(ग) निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 100 शब्दों में दीजिए।
9. अक्कमहादेवी
10. सिद्ध साहित्य
11. नागार्जुन के तर्क
12. अश्वघोष






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