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सत्रीय कार्य : BSKG-176 भारतीय सामाजिक विचारधारा में व्यक्ति, परिवार और समाज
सत्रीय कार्य – BSKG-176/TMA/2026-27
पूर्णांक – 100
नोट – इस सत्रीय कार्य में दिए गए सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
प्रश्न – 1भगवद्गीता के अनुसार आत्मौद्धार का स्वरूप एवं उसके प्रमुख साधनों का विवेचन कीजिए।
प्रश्न – 2स्थितप्रज्ञ पुरुष के प्रमुख लक्षणों का वर्णन कीजिए।
प्रश्न – 3त्रिगुणों का मानव व्यक्तित्व एवं आचरण पर क्या प्रभाव पड़ता है? स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न – 4भगवद्गीता में वर्णित ज्ञानयोग, कर्मयोग एवं भक्तियोग की प्रमुख विशेषताओं का विवेचन कीजिए।
प्रश्न – 5भारतीय संस्कृति में आश्रम-व्यवस्था का स्वरूप एवं सामाजिक महत्व स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न – 6वाल्मीकि रामायण में वर्णित आदर्श पुत्र एवं आदर्श भ्राता के चरित्र का विवेचन कीजिए।
अथवा
पौडह संस्कारों में नामकरण तथा उपनयन संस्कारों के महत्व का वर्णन कीजिए।
प्रश्न – 7सामान्य सूक्त में वर्णित सामाजिक समरसता के आदर्शों का विवेचन कीजिए।
प्रश्न – 8ब्रह्मचर्याश्रम के प्रमुख कर्तव्यों एवं उसके सामाजिक महत्व का विवेचन कीजिए।
प्रश्न – 9कालिदास के काव्यों में वर्णित मानवीय मूल्यों का विवेचन कीजिए।
प्रश्न – 10पञ्चमहायज्ञों की वर्तमान समाज में प्रासंगिकता का विवेचन कीजिए।
अथवा
धर्मशास्त्रों में वर्णित सदाचार की अवधारणा का विवेचन कीजिए।



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