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हिंदी गद्य साहित्य
(BHDC 134)
सत्रीय कार्य
पाठ्यक्रम कोड : बी.एच.डी.सी–134
सत्रीय कार्य कोड : बी.एच.डी.सी:134 / टीएमए / 2026
कुल अंक 100
खंड—क
1.निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
(क) पिताजी उनको बड़ा स्नेह करते थे। उनकी सभी इच्छाएँ वह पूरी करते। पिता का यह स्नेह उन्हें बिगाड़ न दे, इस बात का मेरी माता को खासा ख्याल रहता था। वह अपने अनुशासन में सावधान थीं। मेरी बुआ को कम प्रेम करती थीं, यह तो किसी हालात में नहीं कहा जा सकता। पर आर्य गृहिणी का जो उनके मन में आदर्श था, मेरी बुआ को वे ठीक उसी के अनुसार ढालना चाहती थीं।
(ख) नाश्ता कर गजाधर बाबू बैठक में चले गए। घर छोटा था और ऐसी व्यवस्था हो चुकी थी कि उसमें गजाधर बाबू के हरणे के लिए कोई स्थान न बचा था। जैसे किसी मेहमान के लिए कुछ अस्थायी प्रबंध कर दिया जाता है, उसी प्रकार बैठक में कुर्सियों को दीवार से सटाकर बीच में गजाधर बाबू के लिए पतली सी चारपाई डाल दी गई थी—गजाधर बाबू उस कमरे में पड़े–पड़े, कभी–कभी अनायास ही इस सुसज्जित का अनुभव करने लगे। उन्हें याद हो आती उन रेलगाड़ियों की, जो आती और थोड़ी देर रुककर किसी और लक्ष्य की ओर चली जातीं।
खण्ड—ख
2. हिन्दी गद्य के विकास की विवेचना कीजिए।
3. ‘त्याग–पत्र’ उपन्यास के संरचना और शिल्प पर प्रकाश डालिए।
4. निम्नलिखित विषयों पर लगभग 200–250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए।
क) ‘नमक का दरोगा’ कहानी का कथा–सार
ख) ‘गजाधर बाबू’ की चारित्रिक विशेषताएँ
खंड–ग
5.हजारि प्रसाद द्विवेदी के निबंधों की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
6.‘लोभ और प्रीति’ निबंध के विचार पक्ष का विवेचन कीजिए।
7.निम्नलिखित विषयों पर लगभग 200–250 शब्दों में टिप्पणी लिखिए।
क) हिन्दी निबंध साहित्य के विकास में रामचंद्र शुक्ल का योगदान
ख) ‘सहस्त्र फणों का मणि–दीप’ निबंध का भाव–पक्ष




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