Description
अध्यापक जांच स्त्रीय कार्य
पाठ्यक्रम का कोड : बी. सी. ओ. जी. -171
पाठ्यक्रम का शीर्षक : व्यष्टि अर्थशास्त्र के सिद्धांत
स्त्रीय कार्य का कोड : बी.सी.ओ.जी.-171/टी. एम. ए./2025-26
खण्डों की संख्या : सभी खण्ड
अधिकतम अंक : 100
सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
खण्ड – क (सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 10 अंक का है)
1.अधिमान वक्र को परिभाषित करें। अधिमान वक्र की मान्यताएं और विशेषताओं की व्याख्या करें।
2.हासमान सीमांत उपयोगिता नियम (तृप्त आवश्यकत्ता नियम) और उसकी सीमाओं के सम्बन्ध में बताएं।
- मांग की कीमत लोच से क्या अभिप्राय है ? मांग की कीमत लोच के निर्धारक और महत्व को संक्षेप में समझाएं।
- उत्पादन संभावना वक्र की संकल्पना को स्पष्ट करें। इसकी मान्यताओं का उल्लेख करें तथा इसे किसी उदाहरण की मदद से प्रदर्शित करें।
- कुल, औसत और सीमांत उत्पाद की सहायता से परिवर्ती अनुपातों के नियम की व्याख्या कीजिये।
खण्ड – ख (सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 6 अंक का है)
- बाजार के लिए किसी वस्तु की मांग के प्रमुख निर्धारक बताइए।
- अल्पकालीन औसत लागत वक्र U-आकृति का क्यों होता है ? औसत लागत और सीमांत लागत में क्या संबंध है? उपयुक्त चित्रों का प्रयोग करें।
8.पीछे की ओर झुका हुआ पूर्ति वक्र क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
9.दीर्घकाल में एकाधिकारी का संतुलन निर्धारण समझाइए।
10.सीमांत उत्पादिता सिद्धांत समझाइए। इसकी पूर्व धारणाएं भी बताइए।
खण्ड – ग (सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है)
11.यथार्थमूलक और आदर्शिक अर्थशास्त्र के बीच अंतर बताएं।
12.समोत्पाद वक्र क्या है? समोत्पाद वक्र के क्या लक्षण है?




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