Description
सत्रीय कार्य
(संपूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित)
पाठ्यक्रम कोड : BHDC.-104 / BAHDH
सत्रीय कार्य कोड : BHDC-104/2026-27
कुल अंक : 100
नोट : सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
खंड – क
1.निम्नलिखित पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए :
क.अति ही सरल पंथ यह सूधो छल नहीं जाके माही।
हिंसा द्वैष इरखा मत्सर मद स्वारथ की बातै।
कबहूं याके निकट न आवै छल प्रपंच की धातै।
सहज सुभाविक रहनि प्रेम की प्रीतम सुख सुहकारी।
अपनो कोटि कोटि सुख पिय तिनकही पर बलिहारी।
जहँ ने ज्ञान अभिमान नेम व्रत विशय-वासना आवै।
रीझ खीज दोऊ पीतम की मन आनंद बढ़ावै।
परमारथ स्वारथ दोऊ पीतम और जगत नाहिं जाने।
हरिश्चंद्र यह प्रेम-प्रीति कोउ बिरले ही पहिचाने।
ख.दिवसावसान का समय
मेघमय आसमान से उतर रही है
वह संध्या-सुन्दरी परी-सी
धीरे धीरे धीरे,
तिमिराचल में चञ्चलता का नहीं कहीं आभास,
मधुर-मधुर हैं दोनों उसके अधर-
किन्तु गंभीर- नहीं है उनमें हँस-विलास।
ग.मौन निमंत्रण
स्तब्ध योजना में जब संसार
चकित रहता शिशु-सा नादान,
विश्व के पलकों पर सुकुमार
विचरते हैं जब स्वप्न अजान,
न जाने, नक्षत्रों से कौन
निमंत्रण देता मुझको मौन।
घ.मैं क्षितिज मैं क्षितिज-भृकुटि पर घिर धूमिल,
चिंता का भार बनी अविरल
रज-कण पर जल-कण हो बरसी
नवजीवन-अंकुर बन निकली!
पथ को न मलिन करता आना,
पद-चिह्न न दे जाता जाना,
सुधि मेरे आगम की जग में
सुख की सिहरन हो अंत खिली।
खंड – ख
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए : 10×4=40
2.भारतेंदु का काव्य अलंकारों की भाषा से मुक्त है। कैसे? स्पष्ट कीजिए।
3.द्विवेदी युगीन काव्य की साहित्यिक प्रवृत्तियों पर विचार कीजिए।
4.मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में व्यक्त युगीन संदर्भ पर प्रकाश डालिए।
5.रामनरेश त्रिपाठी के जीवन, व्यक्तित्व और रचना संसार का परिचय दीजिए।
खंड – ग
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में दीजिए : 5×4=20
6.छायावाद की अंतर्वस्तु पर संक्षेप में विचार कीजिए।
7.जयशंकर प्रसाद के काव्य की प्रमुख विशेषताओं को रेखांकित कीजिए।
8.पंत जी के काव्य की अंतर्वस्तु पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
9.महादेवी के काव्य पर संक्षेप में विचार कीजिए।



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