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BSKE-142 2025-26 SOLVED ASSIGNMENT

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स्नातक कला उपाधि (सामान्य)
(BAG)
संस्कृत
BSKE-142 रंगमंच और नाट्यकला
(सत्रीय कार्य)
पाठ्यक्रम कोड : BSKE-142
सत्रीय कार्य कोड : BSKE-142 / 2026+

 

Description

स्नातक कला उपाधि (सामान्य)
(BAG)
संस्कृत
BSKE-142 रंगमंच और नाट्यकला
(सत्रीय कार्य)
पाठ्यक्रम कोड : BSKE-142
सत्रीय कार्य कोड : BSKE-142 / 2026
कुल अंक : 100
नोट : यह सत्रीय कार्य 02 खण्डों में विभक्त है। सभी खण्ड अनिवार्य हैं। 15 अंक के प्रश्नों का विस्तृत उत्तर दीजिए। 10 अंक के प्रश्नों का लगभग आठ सौ शब्दों में उत्तर देना है।
खण्ड–1
निर्देश – निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी चार प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दीजिए :
15×4=60
1. नाट्यगृह निर्माण की विधि का विस्तार से वर्णन कीजिए।
2. आचार्य रेवाप्रसाद द्विवेदी के मत में नाट्यगृह निर्माण विषयक सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।
3. विभिन्न आचार्यों के अनुसार नाट्य की परिभाषा बताते हुए नाटक के किसी चार भेदों का वर्णन कीजिए।
4. नाट्यगृह को परिभाषित करते हुए विकृत और आयात नाट्यगृह का वर्णन कीजिए।
5. रूपक किसे कहते हैं? दशरूपकों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
6. वर्गाकार नाट्यगृह का विस्तार से वर्णन कीजिए।
7. नाट्यगृह के प्रकारों के लिए भरतमूनि ने क्या प्रतिपादन किया है? वर्णन कीजिए।
खण्ड–2
निर्देश: अधोलिखित प्रश्नों में से किसी चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
4×10=40
1. कार्य की अवस्थाओं का उल्लेख कीजिए।
2. नायिका की परिभाषा बताते हुए मुख्य भेदों का उल्लेख कीजिए।
3. नाटक और प्रकरण में क्या अन्तर है? टिप्पणी लिखिए।
4. अभिनय की परिभाषा करते हुए उसके भेदों का वर्णन कीजिए।
5. नायक के भेदों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
6. आधिकारिक और प्रासंगिक कथा वस्तु का वर्णन कीजिए।
7. अर्थ प्रकृतियों पर टिप्पणी लिखिए।

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