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सत्रीय कार्य : BSKC – 133 संस्कृत नाटक
पाठ्यक्रम कोड BSKC – 133
पाठ्यक्रम शीर्षक : संस्कृत नाटक
सत्रीय कार्य : BSKC – 133/TMA/2025-26
पूर्णांक : 100
नोट – सभी प्रश्न अनिवार्य हैं : –
(क) व्याख्या आधारित प्रश्न : –
15X2=30
1.अधोलिखित पंक्तांशों की सन्दर्भ व्याख्या कीजिए : –
(अ) भरतो वा भवेद्राजा वयं वा ननु तत्समम् ।
यदि तेजस्विनो धन्वा स राजा परिपाल्यताम्।।
अथवा
पितुः प्राणपरित्यागां मातुरैश्वर्यलुब्धताम्।
ज्येष्ठभ्रातुः प्रवासं च त्रीन् दोषान् कोऽपि धास्यति।।
(ब) यास्यत्यद्य शकुन्तलेति हृदयं संश्रुषुमुक्कण्ठया
कण्ठः स्तम्भितवाष्पवृत्तिकलुषश्लिष्टत्वजं दर्शनम्।
वैकल्यं मम तावदीदृशमिदं स्नेहादरुण्योऽकसः
पीडयन्ते गृहिणः कथं तु तनयाविश्लेषदुःखैर्वधेव।।
अथवा
भ्रूभ्यां चिराय चतुरन्तमहीसपती
दौष्यात्तमप्रतिरथं तनयं निवेशय।
भर्ता तव पितृकुलदु:खभरेण साध्यं
शान्ते करिष्यसि पदं पुनराश्रमेदस्मिन्।।
(ख) लघु उत्तरीय प्रश्न : –
5X5=25
2.संस्कृत नाटकों के विकास क्रम का वर्णन कीजिए।
3.वीथी रूपक को लक्षण सहित स्पष्ट कीजिए।
4.भरतवाक्य क्या है? लक्षण सहित स्पष्ट कीजिए।
5.‘प्रतिमानाटकं’ नाटक के नामकरण की सार्थकता को स्पष्ट कीजिए।
6.“भर्तृनाथा हि नार्य:” इस स्मृति को स्पष्ट कीजिए।
(ग) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न : –
7.भवभूति के व्यक्तित्व, कर्तृत्व एवं शैलीगत वैशिष्ट्य पर प्रकाश डालिए। 10
8.“काव्येषु नाटकं रम्यं तत्र रम्या शकुन्तला” उक्ति को स्पष्ट कीजिए। 10
9.‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के आधार पर कण्व का चरित्र-चित्रण कीजिए। 10
10.निम्नलिखित में से किन्हीं तीन पर टिप्पणी लिखिए :- 15
(अ) कथानक (ब) ड्ढिम
(स) आकाशभाषित (द) प्रस्तावना





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