Description
MJY-002 सिद्धान्त ज्योतिष एवं काल
(सत्रीय कार्य)
पाठ्यक्रम कोड : MJY-002 .
सत्रीय कार्य कोड : MJY-002 /2024-25
कुल अंक : 100
नोट : यह सत्रीय कार्य 02 खण्डों में विभक्त है। सभी खण्ड अनिवार्य हैं। 15 अंक के प्रश्नों का विस्तृत उत्तर दीजिए। 10 अंक के प्रश्नों का लगभग आठ सौ शब्दों में उत्तर देना है।
खण्ड—1
निर्देश– निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी चार प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दीजिए :
1. सिद्धान्त ज्योतिष के प्रमुख ग्रन्थों का परिचय लिखिये।
2. गोल ज्ञान के विषय में विस्तार से लिखिए।
3. सिद्धान्त स्कन्ध में ग्रहगति के सिद्धान्त का विस्तृत वर्णन कीजिए।
4. अहर्गण किसे कहते है? इसके स्वरूप एवं साधन की विवेचना कीजिए।
5. मन्दफल एवं शीघ्रफल के सिद्धान्त का विस्तार से उल्लेख कीजिए।
6. सिद्धान्त ज्योतिष के प्रमुख ग्रन्थों का परिचय लिखिये।
7. काल की अवधारणा का ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विस्तार से वर्णन कीजिए।
8. ग्रहकक्षा के स्वरूप का विस्तार से वर्णन कीजिए।
खंड–2
निर्देश: अधोलिखित प्रश्नों में से किन्ही चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1. क्रान्ति और अक्षांश के स्वरूप का वर्णन कीजिए।
2. मूर्तकाल की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
3. नवविध काल मान के तात्पर्य का वर्णन कीजिए।
4. अधिकमास क्या है? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अधिकमास के स्वरूप का वर्णन कीजिए।
5. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भूगोल के स्वरूप का उल्लेख कीजिए।
6. ग्रह स्पष्टिकरण से आप क्या समझते हैं? उल्लेख कीजिए।
7. ज्योतिष शास्त्र में अहोरात्र व्यवस्था क्या है? वर्णन कीजिए।




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